हिमाचल राजस्व विभाग रिकॉर्ड में अवैध रूप से दर्ज प्रविष्टियां कोर्ट ने की रद, 9 साल बाद कानूनी वारिसों को मिला हक
सुंदरनगर कोर्ट ने नौ साल पुराने भूमि विवाद में राजस्व रिकॉर्ड में अवैध रूप से दर्ज गैर-मौरूसी किरायेदारी की प्रविष्टियों को रद्द कर दिया है। ...और पढ़ें

सुंदरनगर के कोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड मामले में अहम फैसला सुनाया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
सुंदरनगर कोर्ट ने नौ साल पुराना भूमि विवाद सुलझाया।
राजस्व रिकॉर्ड में अवैध गैर-मौरूसी प्रविष्टियां रद्द की गईं।
वादी को खाली कब्जा सौंपने और निर्माण हटाने का आदेश।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ सिविल जज कोर्ट एक सुंदरनगर ने डैहर में लाखों रुपये मूल्य की भूमि से जुड़े नौ वर्ष पुराने विवाद में फैसला सुनाया है। अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड में अवैध रूप से दर्ज गैर मौरूसी (गैर-कब्जेदार) किरायेदारी की प्रविष्टियों को शून्य घोषित करते हुए वादी के पक्ष में डिक्री पारित की है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को विवादित भूमि का खाली कब्जा सौंपने और उस पर किए गए अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं।
पुश्तैनी जमीन पर गलत तरीके से दर्ज किया था नाम
यह मामला डैहर गांव की खसरा नंबर 99 (रकबा 00-08-08 बीघा) भूमि से संबंधित है। दिवंगत सोहन लाल के कानूनी वारिसों नंद लाल और राकेश कुमार ने याचिका में कहा था कि वर्ष 1980-81 के बंदोबस्त के दौरान राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से उनकी पुश्तैनी जमीन पर प्रतिवादियों के पूर्वजों को गलत तरीके से गैर-मौरूसी बिला लगान के तहत रिश्तेदारी दर्ज कर दिया गया था।
नियमों का उल्लंघन कर हुई प्रविष्टि
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफार्म्स रूल्स और लैंड रिकार्डर्स मैनुअल के नियमों का उल्लंघन करके यह प्रविष्टि की गई थी। न तो कोई रपट दर्ज हुई और न ही भू-मालिकों को सुनवाई का मौका दिया गया।
अदालत ने गैर कानूनी घोषित किया
अदालत ने प्रतिवादियों के पक्ष में दर्ज सभी गैर-मौरूसी राजस्व प्रविष्टियों को गैर कानूनी और निष्प्रभावी घोषित किया। कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे विवादित भूमि पर खड़ा किया गया ढांचा गिराकर खाली कब्जा वादी को सौंपें।
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