हिमाचल में पर्यावरणीय असंतुलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, शिमला ग्रीन बेल्ट व फोरलेन निर्माण पर मांगी ताजा रिपोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश में पर्यावरणीय असंतुलन और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से ताजा रिपोर्ट मांगी है।

चंबा के लाहड़ू में हुआ भारी भूस्खलन। जागरण आर्काइव
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के पर्यावरणीय असंतुलन पर जताई नाराजगी।
सीईसी 5-9 सितंबर तक संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा करेगी।
शिमला ग्रीन बेल्ट और अवैध निर्माण पर तय होगी जवाबदेही।
हंसराज सैनी, मंडी। हिमाचल प्रदेश में लगातार पर्यावरणीय असंतुलन, पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं पर उच्चतम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत पुरानी जानकारियों व आंकड़ों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दोबारा व्यापक समीक्षा के आदेश दिए हैं।
निर्देशों के पालन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) पांच से नौ सितंबर तक राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा और विभागीय समीक्षा बैठकें करने जा रही है। यह सरोकार नेपाल आपदा के आलोक में और प्रासंगिक हो गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को अवगत कराया था कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण संबंधी जानकारी पुरानी है जो वर्तमान पर्यावरणीय स्थिति का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं करती। पीठ ने सीईसी को निर्देश दिया है कि चरणबद्ध तरीके से विभागों के साथ बैठक कर नवीनतम आंकड़ों के आधार पर अंतरिम रिपोर्ट सौंपे।
न्यायालय में दायर याचिकाओं में शिमला के अधिसूचित ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण, पहाड़ियों की कटाई और अवैध पेड़ कटान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। इस बार आधुनिक मैपिंग तकनीक और सैटेलाइट इमेज के जरिए वन क्षरण और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की वैज्ञानिक जांच होगी।
धर्मशाला में छह को होगी समीक्षा बैठक
सुप्रीम कोर्ट के 30 जुलाई के आदेश के पालन के लिए सीईसी ने पांच प्रमुख विशेषज्ञों का उच्चस्तरीय दल गठित किया है। इसमें पूर्व वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव डा. एसएस नेगी, सेवानिवृत्त आइएफएस अधिकारी वीबी कुमार, एचएफआरआइ शिमला के वरिष्ठ विज्ञानी डा. केएल कपूर, एनआइटी हमीरपुर के एसोसिएट प्रोफेसर आरएस बांस्टू और भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआइ) देहरादून के उप निदेशक डा. शैलेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं।
छह सितंबर को धर्मशाला में राज्य सरकार के विभागों की बैठक बुलाई गई है। इसमें जलविद्युतपरियोजनाओं, राष्ट्रीय राजमार्ग, खनन और सड़क चौड़ीकरण से जुड़े विभागों को छह-सात मिनट की प्रेजेंटेशन देनी होगी। सीईसी के निर्देशानुसार अधिकारियों को सभी स्वीकृतियों और तकनीकी मंजूरियों के दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है।
शिमला ग्रीन बेल्ट व अवैध निर्माण पर तय होगी जवाबदेही
सात सितंबर को टीम पालमपुर और मंडी क्षेत्रों का पहला चरणबद्ध फील्ड विजिट करेगी। आठ सितंबर को पंडोह बांध, औट, कीरतपुर-मनाली फोरलेन के कार्यों, सुरंग निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण। नौ सितंबर को दिल्ली लौटते समय टीम बिलासपुर में अवैध खनन और सड़क निर्माण से हुए नुकसान का निरीक्षण करेगी।
उच्चतम न्यायालय ने साफ किया है कि शिमला ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अवैध कटान, भू-कटाव और अनियंत्रित निर्माण जैसी समस्याओं पर प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी। सीईसी के विशेष कार्य अधिकारी वीके पंथारी ने मुख्य सचिव को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। सीईसी की यह पहली अंतरिम रिपोर्ट राज्य में सतत विकास और पर्यावरण संतुलन के लिए नई नीतिगत दिशा तय करेगी।
चार वर्ष में मानसून से व्यापक क्षति
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में चार वर्ष (2023 से 2026) के दौरान मानसून ने व्यापक क्षति पहुंचाई। नुकसान के लिए जलवायु परिवर्तन के कारण बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की घटनाओं में वृद्धि, सड़कों के लिए पहाड़ों की वर्टिकल कटाई, कमजोर ड्रेनेज सिस्टम और नदी-नालों के पास बिना नियमों के हो रहे निर्माण और अतिक्रमण को प्रमुख कारण माना गया।
वर्ष दर वर्ष ब्योरा
- 2023 : इसे सदी की सबसे भीषण आपदाओं में से एक माना गया है। कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में भारी तबाही हुई, जिसमें ₹12,000 करोड़ के करीब का ढांचागत नुकसान हुआ। इस दौरान बादल फटने की रिकार्ड 65 घटनाएं हुईं। हादसों (वर्षाजनित और सड़क हादसे) में 509 लोगों की जान गई।
- 2024: इस साल मानसून में वर्षा सामान्य से थोड़ी कम रही। जुलाई के अंत में शिमला जिले के रामपुर (समेज) और कुल्लू-मंडी में बादल फटने की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया। 1,613 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और 174 लोगों की मौत हुई। बादल फटने की 18 घटनाएं दर्ज की गईं।
- 2025: इस साल फिर से मानसून ने विकराल रूप लिया, जिसमें 47 बार बादल फटे। विशेष रूप से मंडी की सराज घाटी और कुल्लू में भारी फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) आई। 3,525 करोड़ रुपये का नुकसान प्रदेश को झेलना पड़ा। मानसून के दौरान 341 लोगों को जान गंवानी पड़ी।
- 2026 : इस वर्ष मानसून सीजन (31 अगस्त 2026 तक) में नुकसान का आंकड़ा ₹1,202 करोड़ को पार कर चुका है। 259 लोगों की जान विभिन्न हादसों में गई है। बादल फटने की छह घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
यह भी पढ़ें: हिमाचल में सरकारी जमीन कब्जाने वाले की बहू भी नहीं लड़ पाएगी पंचायत चुनाव, नियमों में संशोधन से बदलेगा पूरा गणित
