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    EWS के फर्जी सर्टिफिकेट से हथिया ली टीजीटी मेडिकल की नौकरी, हिमाचल विजिलेंस के रडार पर 4 शिक्षक

    By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 08 Jul 2026 10:59 AM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में फर्जी EWS प्रमाणपत्र के जरिए टीजीटी मेडिकल की नौकरी हासिल करने का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सतर्कता ब्यूरो ने चार आरोपियों को र ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश में फर्जी सर्टिफिकेट से शिक्षक की नौकरी हथियाने का मामला सामने आया है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल प्रदेश में फर्जी सर्टिफिकेट से शिक्षक की नौकरी हथियाने का मामला सामने आया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. फर्जी EWS प्रमाणपत्र से टीजीटी मेडिकल की नौकरी हथियाई।

    2. विजिलेंस ने चार आरोपियों को जांच के दायरे में लिया।

    3. पहले भी 14 आयुर्वेदिक डॉक्टरों पर गिरी थी गाज।

    जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र के इस्तेमाल का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा कर टीजीटी मेडिकल की नौकरी हथियाई गई है। शिकायत मिलने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (विजिलेंस) ने मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है। 

    टीजीटी मेडिकल की नियुक्तियां वर्ष 2024 में बैचवाइज आधार पर हुई थीं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग में टीजीटी मेडिकल के पदों पर भर्ती के दौरान आरोपितों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर मेरिट में स्थान पक्का किया और सरकारी सेवा में प्रवेश पा लिया।

    4 आरोपित रडार पर

    विजिलेंस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर चार आरोपितों को रडार पर लिया है। संबंधित पंचायतों और राजस्व विभाग से इन आरोपितों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए गए, तो आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    14 आयुर्वेदिक डाक्टरों पर भी गिर चुकी है गाज

    यह प्रदेश में इस तरह का पहला मामला नहीं है। इससे पहले 14 आयुर्वेदिक डाक्टरों द्वारा फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी हासिल करने का मामला सामने आ चुका है। स्वास्थ्य विभाग के बाद अब शिक्षा विभाग में इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने से हड़कंप मच गया है। 

    विजिलेंस ने आरोपितों के विरुद्ध मंडी, धर्मशाला और बिलासपुर में मामले दर्ज किए थे। मामला सामने आने के बाद कुछ डाक्टरों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस मामले के सामने आने के बाद विजिलेंस अलर्ट मोड पर 

     पिछले कुछ महीनों में विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती हुए अन्य कर्मचारियों के ईडब्ल्यूएस और अन्य आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्रों को भी खंगाला जा रहा है।

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