हिमाचल पुलिस के अधिकारी पर चढ़ा दी जीप, कई जगह से टूटी टांग; अब मंडी कोर्ट ने सुनाई साढ़े तीन वर्ष की कैद
मंडी अदालत ने सात साल पुराने मामले में पुलिस अधिकारी पर जीप चढ़ाने वाले चेतन शर्मा उर्फ मनू को साढ़े तीन साल के साधारण कारावास और 3,000 रुपये जुर्माने ...और पढ़ें

हिमाचल पुलिस के अधिकारी पर गाड़ी चढ़ाने के दोषी को कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पुलिस अधिकारी पर जीप चढ़ाने वाले को सजा।
मंडी कोर्ट ने साढ़े तीन साल की कैद सुनाई।
ड्यूटी पर हमले को गंभीर चुनौती बताया।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने करीब सात साल पुराने एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पुलिस अधिकारी पर जानलेवा हमला व जीप चढ़ाने के आरोपित चेतन शर्मा उर्फ मनू, निवासी उरला (पद्धर), को दोषी करार देते हुए साढ़े तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही दोषी पर 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यह मामला 18 जुलाई 2019 का है।
नाका तोड़कर भागा था जीप सवार
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना बल्ह में तैनात प्रोबेशनरी सब इंस्पेक्टर जनेश्वर ठाकुर अपनी टीम के साथ लुणापानी के पास यातायात चेकिंग और गश्त पर थे। रात करीब 8:05 बजे एक पिकअप जीप (एचपी66ए-1781) नेरचौक की ओर से आई। जब पुलिस टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, तो चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय उसे तेज रफ्तार में मंडी की ओर भगा दिया।
संदिग्ध होने पर पीएसआइ जनेश्वर ठाकुर ने एक निजी कार (स्विफ्ट) की मदद से जीप का पीछा किया।
गाड़ी टांग पर चढ़ा दी, कई जगह से टूट गई थी हड्डी
कुछ ही दूरी पर बगला स्थित एक पेट्रोल पंप पर दोषी अपनी जीप में तेल भरवा रहा था। जैसे ही पुलिस अधिकारी गाड़ी से उतरकर चालक से पूछताछ करने के लिए उसके दरवाजे के पास पहुंचा, दोषी चेतन शर्मा ने अचानक और जानबूझकर गाड़ी को रिवर्स गियर में डालकर पीछे कर दिया। इस दौरान जीप का टायर अधिकारी की दाईं टांग पर चढ़ गया, जिससे उनकी टांग की हड्डी कई जगह से टूट गई।
वारदात के बाद फरार हो गया था दोषी
वारदात को अंजाम देकर दोषी मौके से फरार हो गया था। अदालत ने आरोपित को भारतीय दंड संहिता की धारा 333 (लोक सेवक को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), धारा 353 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला) और धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) के तहत दोषी पाया। जबकि हत्या के प्रयास व मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं 181, 192 व 196 से बरी कर दिया।
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कोर्ट ने कहा, ऐसे हमले गंभीर चुनौती
मामले में दोषी अब तक कुल 1258 दिन जेल में रह चुका है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिस और अन्य लोक सेवकों पर इस तरह के हमले कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसे मामलों में कड़ी सजा जरूरी है, ताकि समाज में कानून का सम्मान बना रहे।