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IIT मंडी की अनूठी पहल, बेसहारा पशुओं को मिला आसरा; गोबर और कचरे से तैयार करेंगे ऊर्जा

By Pushap Raj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 30 Mar 2026 05:47 PM (GMT+05:30)

आईआईटी मंडी ने बेसहारा पशुओं के लिए एक अनूठी पहल की है। संस्थान आवारा पशुओं को आश्रय दे रहा है ...और पढ़ें

आईआईटी मंडी ने बेसहारा पशुओं को आसरा दिया है।

आईआईटी मंडी ने बेसहारा पशुओं को आसरा दिया है।

HighLights

  1. आईआईटी मंडी ने बेसहारा पशुओं को आश्रय दिया।

  2. 20 किलोवाट का बायोगैस प्लांट स्थापित हो रहा है।

  3. गोबर और कचरे से हाइड्रोजन तेल बनेगा।

संवाद सहयोगी, मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए समाज और पर्यावरण के प्रति एक नई मिसाल पेश की है। संस्थान अब न केवल शोध का केंद्र है, बल्कि बेसहारा पशुओं के लिए एक शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहा है। कटौला-कमांद मार्ग पर बेसहारा पशुओं की समस्या को हल करते हुए संस्थान ने उन्हें आश्रय और उपयोगिता से जोड़ने की क्रांतिकारी योजना शुरू की है।

20 किलोवाट का बायोगैस वेस्ड पावर प्लांट

आइआइटी के कैंपस में 20 किलोवाट क्षमता का बायोगैस वेस्ड पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। यह प्लांट तकनीक का एक उत्कृष्ट उदाहरण होगा, जहां गाय के गोबर से मीथेन गैस बनाई जाएगी। इस मीथेन को आधुनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से हाइड्रोजन में बदला जाएगा और अंततः हाइड्रोजन तेल का निर्माण किया जाएगा। यह कदम संस्थान को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

कचरे से ऊर्जा बनाने की योजना

संस्थान का लक्ष्य केवल गोबर तक सीमित नहीं है। वर्तमान में संस्थान 40 बेसहारा गायों का पालन कर रहा है। कैंपस की मेस से निकलने वाला सब्जियों का कचरा। फ्लैट्स और अपार्टमेंट से निकलने वाले फलों के अवशेष और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के वेस्ट से भी ऊर्जा बनाने की योजना है। भविष्य में मंडी शहर में भी बायोगैस पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। 

क्या कहते हैं निदेशक

यह परियोजना केवल परिसर तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में जरूरत पड़ने पर आसपास के ग्रामीणों से गोबर की खरीद की जाएगी। इससे न केवल सड़कों पर आवारा पशुओं की संख्या कम होगी, बल्कि स्थानीय किसानों और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी।
-प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, निदेशक, आइआइटी मंडी।

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