कौल सिंह ठाकुर के सक्रिय राजनीति से संन्यास के क्या हैं मायने, अब कौन होगा द्रंग में कांग्रेस का चेहरा?
आठ बार के विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर ने 50 साल की सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है, जिससे हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक हलचल मच गई ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर। जागरण आर्काइव
HighLights
कौल सिंह ठाकुर ने 50 साल की सक्रिय राजनीति छोड़ी।
संन्यास से द्रंग विधानसभा में नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे।
पोते डॉ. कुलकीर्ति के राजनीतिक भविष्य पर अटकलें तेज।
आशीष भोज, पद्धर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहे कद्दावर कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया है। आठ बार के विधायक, चार बार मंत्री, एक बार विधानसभा अध्यक्ष और दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे कौल सिंह ने 50 वर्ष लंबे राजनीतिक सफर पर विराम लगाने का निर्णय हिसार स्थित संत रामपाल के आश्रम में लिया।
रविवार को रामपाल से मुलाकात के दौरान कौल सिंह ने कहा कि- मैं चार बार कैबिनेट मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहा लेकिन समय परिवर्तनशील है और लोकतंत्र में नई सोच व नए नेतृत्व को आगे आना चाहिए। इसी भावना के साथ मैं सक्रिय राजनीति छोड़ रहा हूं।' अब नई पीढ़ी द्रंग के विकास की इस यात्रा को आगे बढ़ाएगी। इस पर रामपाल ने कहा कि अब भक्ति करो। दोनों के वातार्लाप का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर खूब प्रसारित हो रहा है।
इस दौरान कौल ने अस्वस्थ पत्नी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की। कौल सिंह ने संत रामपाल से देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भी सत्संग आयोजित करने का विशेष आग्रह किया ताकि यहां की जनता को भी आध्यात्मिक लाभ मिल सके।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र में राजनीति की धुरी रहे पूर्व मंत्री के फैसले से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। वर्ष 1977 से सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले कौल सिंह ठाकुर ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को अंतिम चुनाव घोषित कर मैदान संभाला था, लेकिन उन्हें हार झेलनी पड़ी।
तो मुख्यमंत्री पद पर होते
चुनावी हार का यह दर्द वह गाहे-बगाहे कई मंचों से जाहिर भी कर चुके हैं। उनका साफ कहना था कि अगर जनता ने जिताया होता, तो वह मुख्यमंत्री पद पर आसीन होते। अनदेखी और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कई बार प्रश्न उठाने वाले कौल सिंह की कसक संन्यास के रूप में सामने आई है। हालांकि संन्यास के पीछे उनकी पत्नी के खराब स्वास्थ्य का तर्क दिया जा रहा है, लेकिन इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि द्रंग क्षेत्र में उनके इस फैसले के बाद नए समीकरण बनने तय हैं।
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क्या पोते डा. कुलकीर्ति का मार्ग कर रहे प्रशस्त
कौल के संन्यास से कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पोते डा. कुलकीर्ति के लिए राजनीति जमीन तैयार कर रहे हैं? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि डा. कुलकीर्ति भाजपा का दामन थाम सकते हैं। अगर कौल सिंह चुनावी रण से हटते हैं तो द्रंग कांग्रेस में टिकट की जंग बेहद दिलचस्प और तेज हो जाएगी।
ये भी हैं दौड़ में
वर्तमान में 2027 के टिकट की दौड़ में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर और पूर्व ब्लाक अध्यक्ष जोगेंद्र गुलेरिया सहित कई नेता कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
क्या कहते हैं कांग्रेस नेता
जिला कांग्रेस महासचिव हेम सिंह ठाकुर ने कौल सिंह ठाकुर के इस फैसले पर कहा कि उनके बिना द्रंग की राजनीति अधूरी है। उन्होंने इस फैसले पर पुनर्विचार करने और सक्रिय राजनीति में बने रहने की अपील की है।