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कीरतपुर-मनाली फोरलेन: मैहला से भवाणा के बीच 4 टनल के निर्माण में फंसा पेंच, पुलों पर भी मंत्रालय ने जताई आपत्ति

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 24 Sep 2026 06:33 AM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 11:01 AM (IST)

कीरतपुर-नागचला फोरलेन पर मैहला से भवाणा के बीच चार नई सुरंगों का निर्माण वन भूमि की मंजूरी और सड़क परिवहन मंत्रालय की आपत्तियों के कारण अधर में है।

कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सुरंग निर्माण में पेंच फंस गया है। प्रतीकात्मक फोटो

कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सुरंग निर्माण में पेंच फंस गया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. वन भूमि मंजूरी और मंत्रालय की आपत्तियों से सुरंग निर्माण रुका।

  2. चार नई सुरंगों के लिए सात हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता।

  3. मंत्रालय ने नए पुलों पर आपत्ति जताई, मौजूदा से जोड़ने का सुझाव।

जागरण संवाददाता, मंडी। कीरतपुर-नागचला के बीच फोरलेन मार्ग पर मैहला से भवाणा के बीच प्रस्तावित चार नई सुरंगों का निर्माण वन भूमि की मंजूरी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की आपत्तियों के कारण अधर में लटक गया है। फोरलेन को सुचारू और दुर्घटनामुक्त बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने मैहला, तुन्नू, टिहरा और भवाणा में पहले से बनी सुरंगों के समानांतर एक-एक और नई सुरंग बनाने की योजना तैयार की थी। हालांकि, प्रशासनिक और तकनीकी पेच फंसने से फिलहाल निर्माण कार्य पर ब्रेक लग गया है।

कितनी भूमि चाहिए

चारों नई सुरंगों के निर्माण के लिए एनएचएआइ को करीब सात हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता है। वर्तमान में संबंधित स्थलों पर आवश्यक वन भूमि उपलब्ध न होने के कारण मामला बीच में अटक गया है। जब तक भूमि का हस्तांतरण और क्लीयरेंस नहीं मिल जाती, तब तक धरातल पर काम शुरू होना असंभव दिख रहा है।

नए पुलों पर मंत्रालय की आपत्ति 

समस्या केवल सुरंगों तक सीमित नहीं है। मंत्रालय ने इन सुरंगों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित नए पुलों के निर्माण पर भी आपत्ति जताई है। मंत्रालय का तर्क है कि नए पुलों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और निर्माण जटिलता बढ़ाने के बजाय एनएचएआइ को व्यावहारिक विकल्पों पर काम करना चाहिए। इसके लिए एनएचएआई को निर्देश दिए गए हैं कि वह नई सुरंगों के पोर्टल (प्रवेश व निकास द्वार) को वर्तमान में बने चार लेन पुलों से ही जोड़ने की संभावनाएं तलाशें, ताकि अतिरिक्त निर्माण से बचा जा सके।

पहले चरण में बनी पांच टनल

बिलासपुर जिले के कैंचीमोड़ से सुंदरनगर के भवाणा तक प्रथम चरण में पांच सुरंगों का निर्माण हुआ था। द्वितीय चरण में कैंचीमोड़ पर दूसरी सुरंग का निर्माण हो चुका है। मैहला से भवाणा के बीच यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए दोहरी सुरंग व्यवस्था की योजना बनाई गई थी। मौजूदा सुरंगों के साथ एक-एक अतिरिक्त सुरंग बनने से फोरलेन पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह एकतरफा और सुरक्षित हो जाएगी।

तकनीकी टीम मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार सुरंग पोर्टल के री-डिजाइन और मौजूदा पुलों से कनेक्टिविटी की रिपोर्ट तैयार करने में लगी हुई है। वन भूमि का पेंच सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई मंडी।

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