बैंक लोन न चुकाने पर संपत्ति का कब्जा लेने का आदेश, मंडी कोर्ट ने एक महीने में एक्शन लेने का निर्देश दिया
मंडी कोर्ट ने एयू स्माल फाइनेंस बैंक की अर्जी स्वीकार करते हुए ऋण न चुकाने वाले देनदारों की संपत्ति का कब्जा लेने का आदेश दिया है। अधिवक्ता अभिषेक लखन ...और पढ़ें

मंडी कोर्ट ने बैंक कर्ज न चुकाने पर संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
मंडी कोर्ट ने एयू बैंक की अर्जी स्वीकार की, संपत्ति कब्जे का आदेश।
ऋण न चुकाने वाले देनदारों की संपत्ति का कब्जा लिया जाएगा।
अधिवक्ता अभिषेक लखनपाल को रिसीवर नियुक्त किया गया है।
जागरण संवाददाता, मंडी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंडी की अदालत ने एयू स्माल फाइनेंस बैंक की अर्जी को स्वीकार करते हुए ऋण न चुकाने वाले देनदारों की संपत्ति का कब्जा लेने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए अधिवक्ता अभिषेक लखनपाल को रिसीवर नियुक्त किया है। मामले के अनुसार प्रतिवादी दलीप सिंह, सावित्री और गोपाल सिंह (निवासी गांव हाट, कुल्लू) ने बैंक से वित्तीय सहायता ली थी।
इसके बदले उन्होंने तहसील सदर (जिला मंडी) के मुहाल धन्यारी स्थित अपनी संपत्ति (खेवट/खतौनी नं. 39/42, खसरा नं. 547, 551, 553, 559, 564, 618) को बैंक के पास गिरवी रखा था। ऋण की अदायगी न होने पर बैंक ने खाते को 9 दिसंबर 2025 को गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया था। उस समय तक देनदारों पर 20,26,276 रुपये की देनदारी बकाया थी।
पुलिस बल की उपस्थिति में होगी कार्रवाई
धारा 13(2) के तहत 60 दिनों का नोटिस देने के बावजूद जब कोई भुगतान या आपत्ति दर्ज नहीं की गई, तो बैंक ने सरफेसी अधिनियम की धारा 14 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने रिसीवर को निर्देश दिए हैं कि वह एक महीने के भीतर देनदारों को अग्रिम नोटिस देकर पुलिस सहायता और महिला कांस्टेबल की मौजूदगी में संपत्ति का भौतिक कब्जा लें।
वीडियोग्राफी का आदेश
अदालत ने यह भी साफ किया कि कब्जे की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी कराई जाए। साथ ही, तहसीलदार सदर को राजस्व अधिकारियों (कानूनगो व पटवारी) को भूमि की पहचान के लिए तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
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