दीपावली पर मिठाई के आकार की मोमबत्तियां बनी आकर्षण, 30 रुपये में पानी से जलने वाले दीया भी खूब भा रहा
मंडी में दीपावली की तैयारियों के बीच बाजार में मिठाई के आकार की मोमबत्तियां और पानी से जलने वाले दीये लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

दीपावली पर मंडी बाजार में रखे मिठाई के आकार के दीये। जागरण
HighLights
मिठाई के आकार की मोमबत्तियां बनीं दीपावली का मुख्य आकर्षण।
पानी से जलने वाले दीये 30 रुपये में उपलब्ध, खूब पसंद किए जा रहे।
प्राकृतिक रंगोली और 3D प्रिंट देवी-देवताओं के चित्र भी लोकप्रिय।
साक्षी ठाकुर, मंडी। दीपावाली के मद्देनजर मंडी में उत्साह का माहौल है। घरों, दुकानों और मंदिरों को सजाने के लिए लोग तैयारियों में जुटे हैं। सेरी मंच, इंदिरा मार्केट और चौहट्टा बाजार सहित विभिन्न स्थानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। इस बार बाजार में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ रसमलाई, गुलाब जामुन और मोतीचूर के लड्डू के आकार की मोमबत्तियां भी उपलब्ध हैं। मिठाई के रूप में बनी ये मोमबत्तियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। इनकी शुरुआती कीमत 150 से 300 रुपये तक है।
पानी से जलने वाले, बिजली से जलने वाले और पानी पर तैरने वाले दीये भी पसंद किए जा रहे हैं। इनकी कीमत 30 से 200 रुपये तक है।
सजावट का सामान
सजावट के सामान में सीपियों से बनी लड़ियां इस वर्ष नया आकर्षण हैं। चमकीले दर्पणों वाले तोरण, धातु की लड़ियां, रंग-बिरंगे धागों और कपड़ों के फूलों से तैयार तोरण, कृत्रिम फूलों की मालाएं और गमले भी खूब बिक रहे हैं। व्यापारी राजेश के अनुसार, इनकी शुरुआती कीमत 100 रुपये है और ये 400 रुपये तक उपलब्ध हैं।
लेमिनेशन प्रिंट से बने चित्रों को प्राथमिकता
देवी-देवताओं के चित्रों की पसंद में भी बदलाव आया है। पहले लोग कैलेंडर या नक्काशीदार चित्र पसंद करते थे, लेकिन इस बार डिजिटल कला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और त्रिआयामी लेमिनेशन प्रिंट से बने चित्रों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। ये चित्र 250 से 2,000 रुपये तक उपलब्ध हैं।
प्राकृतिक रंगों को महत्व
रंगोली के लिए रासायनिक रंगों की जगह घरेलू और प्राकृतिक रंगों को महत्व दिया जा रहा है। सेरी मंच पर रंग बेचने वाली अंजलि और उनकी बहन शिवानी ने बताया कि वे हल्दी, पालक, सिंदूर और लकड़ी के बुरादे से पूरी तरह प्राकृतिक रंग बनाती हैं। ग्राहक इन्हें पसंद कर रहे हैं। इन रंगों की कीमत 30 से 100 रुपये प्रति थैली है।
स्थानीय विक्रेताओं ने उम्मीद जताई है कि लोग बड़े शोरूमों के बजाय छोटे व्यापारियों से खरीदारी करेंगे, जिससे उनकी दिवाली भी मंगलमय और आनंदमयी हो सके।
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