यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 06, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Himachal: अगर 1905 जैसा भूकंप आया तो हो जाएगा सब तहस-नहस, हिमाचल पर छाया नया संकट; तैयार होगी रणनीति
Himachal हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप और आपदा से नुकसान के लिए विज्ञानियों ने भौगोलिक सर्वेक्षण के साथ विज्ञानी तकनीक के तहत निर्माण और विकास की आवश्यक ...और पढ़ें

HighLights
- भूस्खलन रोकने के लिए टिहरी माडल पर काम करने की जरूरत बताई
- कहा कि 1905 जैसा भूकंप फिर आया तो सब ठप हो जाएगा।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप और आपदा से नुकसान के लिए विज्ञानियों ने भौगोलिक सर्वेक्षण के साथ विज्ञानी तकनीक के तहत निर्माण और विकास की आवश्यकता जताई है। हिमाचल व अन्य हिमालयी क्षेत्रों में मानूसन के दौरान हुए नुकसान को कम करने के लिए स्ट्रकचर इंजीनियरिंग के साथ टिहरी माडल और आइजोल की योजना का अनुसरण करने का सुझाव दिया गया।
यह सुझाव शिमला में देश के जाने माने विज्ञानियों ने पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में भूकंप और भूस्खलन के भूविज्ञानी खतरे को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान दिए। कहा गया कि भूंकप जैसी त्रासदी के लिए भविष्य की योजनाएं बनाए जाने की आवश्यकता है। कहा कि 1905 जैसा भूकंप फिर आया तो सब ठप हो जाएगा।
टीहरी मॉडल को अपनाने पर जोर
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के उपमहानिदेशक डा. हरीष बहुगुणा ने टीहरी माडल को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वहां पर इस तरह से निर्माण किया गया है कि मामूली सा भी भूस्खलन नहीं हुआ है। हिमाचल में अगले वर्ष क्षेत्रीय भूस्खलन पूर्वानुमान केंद्र स्थापित हो जााएगा, जिससे समय से पूर्व आपदा की जानकारी दी जा सकेगी। इसे 11 राज्यों में शुरू किया जा रहा है।
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भूगर्भ सर्वेक्षण कार्यालय चंडीगढ़ हिमाचल के लिए हर तरह की सहायता उपलब्ध कर रहा है। एशिया महाद्वीप में अधिक भूस्खलन वाले दस देशों में भारत भी शामिल है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के तहत देश में 87 हजार भूस्खलन स्थान चिन्हित किए गए हैं। हिमाचल में 17 हजार ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं। विज्ञानियों ने कहा कि नालों पर पार्किंग और भवन बनाए जा रहे हैं। नालों के मंह बंद कर आपदा को आमंत्रण दिया जा रहा है।
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ज्यादा नुकसान भूस्खलन से : घारापुरा
प्रबंध निदेशक सामान्य निर्माण पुणे आशीष डी घारापुरा ने कहा कि 1905 में कांगडा में आए भूकंप से 20 हजार लोगों की मौत हुई थी। सबसे ज्यादा नुकसान भूस्खलन के कारण होता है। इसके लिए आवश्यक है कि भूमि स्थिरीकरण के साथ विज्ञानी तरीके से विकास और कार्य हों। उन्होंने भूस्खलन रोकने की तकनीकों और जल निकासी की बेहहर व्यवस्था की आवश्कयता जताई।
शिमला में लगातार हो रहे निर्माण पर अंकुश लगे
भूगर्भ विज्ञानी व दक्षिण एशिया जियोहाजाड्स इंटरनेशनल के क्षेत्रीय संयोजक डा. हरि कुमार ने कहा कि शिमला में लगातार हो रहे निर्माण पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। आइजोल में दस वर्ष से आपदा में नुकसान को रोकने के लिए जो कार्य किए हैं उन्हें अपनाने की आवश्यकता है।
बरसात के दौरान कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ भूगर्भ विज्ञानियों को एमपैनल करने की आवश्यकता है। इससे भूमि की क्षमता और उसके आधार पर निर्माण के संबंध में बताया जा सकेगा कि आखिर दीवार कितनी मोटी और भवन कितना मंजिला होगा।