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    'हिमाचल सरकार वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर न फोड़े', CM के राजस्व घाटा अनुदान बंद करने के बयान पर अनुराग का पलटवार

    By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 02 Feb 2026 05:00 PM (IST)

    अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री के राजस्व घाटा अनुदान (RDG) संबंधी बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार वित्तीय कुप्रबंधन के लिए केंद्र ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और सांसद अनुराग ठाकुर। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और सांसद अनुराग ठाकुर। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. अनुराग ठाकुर ने सीएम के RDG बयान पर पलटवार किया।

    2. हिमाचल का विभाज्य पूल में हिस्सा बढ़ा, ₹2,388 करोड़ की वृद्धि।

    3. 16वें वित्त आयोग ने RDG को अस्थायी उपाय बताया।

    जागरण संवाददाता, शिमला। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को 16वें वित्त आयोग द्वारा बंद किए जाने के संबंध में की गई टिप्पणियों पर जवाब दिया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर कांग्रेस सरकार प्रदेश को गुमराह कर रही है।

    कांग्रेस सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर ना फोड़े। उन्होंने कहा कि हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। अन्यायपूर्ण कटौती कांग्रेस के खोखले दावों के विपरीत है।

    16 वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश का विभाज्य पूल में हिस्सा 15वें वित्त आयोग के 0.830  प्रतिशत से बढ़ाकर 0.914 प्रतिशत कर दिया है। नए फॉर्मूले के तहत हिमाचल का पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति 2025-26 के बजट अनुमान (बीई) में लगभग 11,561.66 करोड़ से बढ़कर 13,949.97 करोड़ हो गया है, जो लगभग 2,388 करोड़ की वृद्धि है। यह केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। 

    15 वें वित्त आयोग के तहत कोविड से उबरने में राज्यों की मदद के लिए आरडीजी फ्रंट-लोडेड था और इसे स्पष्ट रूप से समयबद्ध, संक्रमणकालीन उपाय के रूप में तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्यों को 2025-26 तक लगभग शून्य राजस्व घाटे तक लाना था।

    16वें वित्त आयोग ने परिणामों की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि 14 वें वित्त आयोग और 15 वें वित्त आयोग के तहत बड़े आरडीजी हस्तांतरणों के बावजूद, वास्तविक राजस्व घाटा सामान्य की ओर नहीं बढ़ा, क्योंकि कई राज्यों ने राजस्व संग्रहण को मजबूत नहीं किया या व्यय को युक्तिसंगत नहीं बनाया। इसलिए 16वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी को जारी रखना प्रतिकूल माना, क्योंकि यह विकृत प्रोत्साहन पैदा कर सकता है।

    राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं

    मोदी सरकार राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करती है। 16वें वित्त आयोग फॉर्मूले के तहत कई विपक्षी शासित राज्यों को भी डेवोल्यूशन में लाभ हुआ है। 16वें वित्त आयोग द्वारा शुरू की गई क्षैतिज पुनर्वितरण में मानदंडों का पुनः वेटेज किया गया, जिसमें जनसंख्या, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन पर भार बढ़ाया गया और जीडीपी में योगदान के लिए 10 प्रतिशत वेटेज जोड़ा गया, जबकि क्षेत्रफल पर भार कम किया गया। इससे कई राज्यों को लाभ हुआ, जिनमें कई विपक्षी शासित राज्य भी शामिल हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों को कमी आई। इसलिए 16 वें वित्त आयोग के समायोजन को पक्षपातपूर्ण अभ्यास के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता है।

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