बच्चा रात में पांव के दर्द से जाग जाता है तो बरतें सतर्कता, सूजन, लालिमा सहित इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी के अनुसार, बच्चों में रात में होने वाला पैरों का दर्द अक्सर ग्रोइंग पेन होता है, जो 3 से 12 वर्ष की आयु में सामान्य ...और पढ़ें

बच्चों में अकसर रात को पांव दर्द की समस्या होती है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
ग्रोइंग पेन 3-12 वर्ष के बच्चों में सामान्य है।
रात में पैरों की हल्की मालिश, गुनगुनी सिकाई से आराम।
सूजन, बुखार या एक पैर में दर्द पर डॉक्टर को दिखाएं।
जागरण संवाददाता, शिमला। कई माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनका बच्चा दिनभर सामान्य रूप से खेलता-कूदता है, लेकिन शाम या रात होते ही पैरों में दर्द की शिकायत करने लगता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी ने बताया कि अधिकांश मामलों में इसका कारण ग्रोइंग पेन होता है, जो बचपन में होने वाली एक सामान्य और हानिरहित समस्या है।
डॉ. धर्माणी के अनुसार, यह समस्या आमतौर पर 3 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों में अधिक देखी जाती है। दर्द दोनों पैरों में होता है और पिंडली, जांघ या घुटनों के पीछे महसूस होता है। इसकी खास बात यह है कि दर्द अधिकतर शाम या रात में होता है, कभी-कभी बच्चे की नींद भी खुल जाती है, लेकिन सुबह तक दर्द अपने-आप ठीक हो जाता है और बच्चा सामान्य रूप से खेलने-कूदने लगता है। उन्होंने कहा कि आजकल इसके मरीज आ रहे हैं। पहले इनकी संख्या कम रहती थी।
इसके सामान्य लक्षण
दर्द अकसर दोनों पैरों में होता है। पिंडली, जांघ या घुटनों के पीछे दर्द महसूस हो सकता है। दर्द अधिकतर शाम या रात में शुरू होता है और कभी-कभी बच्चे की नींद भी खुल जाती है। सुबह तक दर्द अपने-आप समाप्त हो जाता है। इसका एक निश्चित कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिनभर की शारीरिक गतिविधियों के बाद मांसपेशियों में थकान या कुछ बच्चों में दर्द के प्रति अधिक संवेदनशीलता इसकी भूमिका निभा सकती है। अध्ययनों में विटामिन डी की कमी वाले बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी गई है।
घर पर क्या करें
बच्चे को रात में इस प्रकार का दर्द हो तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। पैरों की हल्की मालिश करें। जांघ और पिंडली की मांसपेशियों की हल्की स्ट्रेचिंग कराएं। गुनगुनी सिकाई से आराम मिल सकता है। यदि दर्द अधिक हो और डॉक्टर ने सलाह दी हो, तो बच्चे की उम्र और वजन के अनुसार पैरासिटामोल दी जा सकती है।
कब सतर्क होना चाहिए
हर पैर का दर्द ग्रोइंग पेन नहीं होता। दर्द केवल एक पैर में हो। दिन में भी लगातार बना रहे। बच्चा चलने में लंगड़ाने लगे। सूजन, लालिमा या गर्माहट दिखाई दे। तेज बुखार के साथ दर्द हो। दर्द लगातार बढ़ता जाए। बच्चे का वजन कम होने लगे या वह अत्यधिक सुस्त रहने लगे। बार-बार हड्डियों या जोड़ों में दर्द और सूजन हो।