हिमाचल के 12000 मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए एक समान नीति बनाएगी सरकार, CM सुक्खू बोले- मानदेय में भी एकरूपता आएगी
हिमाचल प्रदेश सरकार विभिन्न विभागों में कार्यरत 12,000 मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए एक समान नीति बनाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बात रखते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।
HighLights
सरकार मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए समान नीति बनाएगी।
सेवा शर्तों और मानदेय में एकरूपता लाई जाएगी।
हिमाचल में 12,000 मल्टी टास्क वर्कर्स कार्यरत हैं।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड व निगमों में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर के लिए सरकार एक समान नीति बनाएगी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान इसका एलान किया। वह विधायक आरएस बाली के प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी निगम बोर्ड के अलावा विभागों में तैनात मल्टी टास्क वर्कर्स से अलग-अलग तरह से काम लिया जाता है। कुछ से चार घंटे, कुछ से छह घंटे काम लिया जाता है। सभी की सेवा शर्तें अलग-अलग हैं। इन्हें मानदेय भी अलग-अलग दिया जा रहा है।
मानदेय में एकरूपता आएगी
सरकार ने मल्टी टास्क वर्कर के लिए एक समान नीति लाने का फैसला लिया है, जिस पर सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। इस नीति के आने से मल्टी टास्क वर्कर के मानदेय में एकरूपता आएगी।
कब कितने पद भरे
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि जल शक्ति विभाग में 4100 मल्टी टास्क वर्कर्स के पद भरे हैं। इनमें से 866 पद वर्ष 2020-21 में 1397 वर्ष 2021-22 में, 373 वर्ष 2022-23 में और 1464 वर्ष 2023-34 में भरे गए हैं। इनमें पहले 6600 मानदेय मिलता था, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 7100 किया है।
कोटा बढ़ाने की मांग
विधायक आरएस बाली ने कहा कि यह ग्राउंड जीरो पर काम करते हैं। आठ साल बाद जॉब ट्रेनी बनेंगे फिर अनुबंध पर आएंगे। इसमें भी कोटा 15 प्रतिशत है। इस कोटा को बढ़ाने की मांग उन्होंने उठाई।
प्रदेश में 12 हजार मल्टी टास्क वर्कर्स
हिमाचल में मौजूदा समय में 12 हजार मल्टी टास्क वर्कर्स हैं। सबसे ज्यादा संख्या शिक्षा, लोक निर्माण व जलशक्ति विभाग में है। इसके अलावा अन्य विभागों बोर्ड व निगमों में भी इनकी तैनाती की गई है। सरकार ने इसके लिए उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक सब कमेटी भी पहले से बनाई हुई है।
