हिमाचल विधानसभा में गरमाया OBC आरक्षण का मुद्दा, सुखराम बोले- 610 में से मात्र 14 सीटें तो भद्दा मजाक
हिमाचल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गरमाया, जहां भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने एमबीबीएस की 610 में से मात्र 14 सीटें आरक्षित होने को 'भद्दा मजाक' बताया।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बात रखते सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।
HighLights
विधानसभा में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाया गया।
सुख राम चौधरी ने 14 एमबीबीएस सीटों पर सवाल उठाया।
सीएम सुक्खू ने जनगणना के बाद फैसले का आश्वासन दिया।
जागरण टीम, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को आरक्षण का मामला उठा। पिछड़ा वर्ग को सरकारी विभागों में नौकरियों और प्रशिक्षण देने के लिए आरक्षण का मुद्दा गूंजा। भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने प्रश्नकाल में सरकार से यह सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि सरकार बताए इसमें कितना प्रतिशत आरक्षण पिछड़ा वर्ग को दिया जा रहा है। एमबीबीएस में कितना प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, विश्वविद्यालयों में नौकरियों में ओबीसी वर्ग के लिए कितना आरक्षण दिया जा रहा है।
सुख राम चौधरी ने सदन में कहा कि सरकार ने जवाब दिया कि एमबीबीएस में आईजीएमसी में 102 में से 4 सीटें आरक्षित हैं, मेडिकल कॉलेज टांडा में 2, नेरचौक मंडी में 101 में से 2, हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में 102 में से 2 और चंबा मेडिकल कॉलेज में भी 2 सीटें हैं।
यह ओबीसी के साथ भद्दा मजाक
सुखराम ने कहा यानि हिमाचल में एमबीबीएस की कुल 610 में से मात्र 14 सीटें आरक्षित हैं, यह ओबीसी वर्ग के साथ भद्दा मजाक है, हिमाचल में ओबीसी की संख्या 24 प्रतिशत है और इस वर्ग में बहुत केटेगरी हैं, ये ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक समान आरक्षण दे, एमबीबीएस में ओबीसी के लिए 18 प्रतिशत हो। इसके अलावा अन्य नौकरियों में सरकार युक्तिकरण करे।
अब राजनीतिक बात कर रहे हैं : सुक्खू
सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रश्न के उत्तर में सदन में कहा आप तो मंत्री थे, आपने कोई कदम क्यों नहीं उठाए, अपनी सरकार में मामला क्यों नहीं उठाया, अब राजनीतिक बात कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी ने ही ओबीसी वर्ग का सबसे ज्यादा कल्याण किया है। सरकार ओबीसी वर्ग की भावनाओं के आधार पर कार्य कर रही है, इसलिए हमारी सरकार ने ओबीसी कमिशन भी बनाया।
जनगणना के बाद उचित फैसला लेगी सरकार
आयोग इस मामले में काम कर रहा है, इसमें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का भी ख्याल रखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा न हो, इसके अलावा जनगणना का कार्य पूरा होने बाद सरकार आरक्षण को लेकर उचित फैसला लेगी।
