'बुजुर्गों की देखभाल न करने पर वापस ली जा सकती है दान दी जमीन', हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
हिमाचल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति बुजुर्ग से भरण-पोषण की शर्त पर जमीन दान में लेता है और शर्त का पालन नहीं करता, तो बुजुर्ग को जमी ...और पढ़ें

बुजुर्गों की देखभाल न करने पर वापस ली जा सकती है दान दी जमीन।
HighLights
भरण-पोषण शर्त पर दान की जमीन वापस मिल सकती है।
केवल पैसे भेजना भरण-पोषण नहीं, देखभाल भी जरूरी।
हाई कोर्ट ने बुजुर्गों के पक्ष में सुनाया फैसला।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस शर्त पर किसी बुजुर्ग से जमीन दान में लेता है कि वह भविष्य में उनका भरण-पोषण करेगा तो शर्त का पालन न होने पर बुजुर्ग को वह दान रद कर जमीन वापस पाने का कानूनी अधिकार है।
यह निर्णय न्यायाधीश राकेश कैंथला ने दीवानी नियमित अपील पर सुनवाई करते हुए सुनाया है। हाई कोर्ट ने जिला अदालत के निर्णय को पलटते हुए जमीन पाने वाले व्यक्ति की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि दानपत्र की शर्त 'देखभाल और भरण-पोषण' करने की थी, न कि केवल कुछ पैसे भेजने की।
अदालत ने कहा कि एक वृद्ध व्यक्ति को बुढ़ापे में शारीरिक देखभाल, मानसिक संबल, भोजन, दवा और व्यक्तिगत ध्यान की आवश्यकता होती है। उन्हें उनके हाल पर छोड़कर केवल पैसे भेज देना भरण-पोषण की श्रेणी में नहीं आता। चूंकि उस व्यक्ति ने बुजुर्ग दंपती को साथ रखकर उनकी सेवा नहीं की, इसलिए उसने दानपत्र की मूल शर्त का उल्लंघन किया है और वह जमीन पर अपना हक खो चुका है।
कोर्ट ने सब जज अदालत के उस आदेश को बहाल कर दिया है, जिसमें दानपत्र को रद घोषित किया गया था। चूंकि मामले की लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान मूल बुजुर्ग याचिकाकर्ता का निधन हो चुका था, इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि वह विवादित जमीन अब बुजुर्ग के कानूनी उत्तराधिकारियों को तुरंत वापस सौंपी जाए।
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क्या था मामला
शिमला जिले की ठियोग तहसील निवासी बुजुर्ग दंपती खेती करने में असमर्थ था। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए नजदीकी व्यक्ति ने वादा किया कि यदि बुजुर्ग आधी जमीन उसके नाम कर दे तो वह जीवनभर दोनों की सेवा करेगा। बुजुर्ग ने विश्वास करके 1997 में आधी जमीन उसे दे दी। दानपत्र में शर्त लिखी थी कि यदि वह व्यक्ति बुजुर्ग और उनकी पत्नी की देखभाल करने में लापरवाही बरतता है, तो दान रद माना जाएगा।
जमीन नाम होते ही व्यक्ति और उसके परिवार ने बुजुर्ग दंपती को भोजन और दवा देने से मना कर घर से निकाल दिया। इससे तंग आकर बुजुर्ग ने ट्रायल अदालत में जमीन वापस पाने के लिए मामला दायर कर दिया।
अदालत में जमीन पाने वाले व्यक्ति ने दलील दी कि बुजुर्ग ने मर्जी से घर छोड़ा था और उसने बुजुर्ग को गुजारे के लिए दो-तीन बार डाक से पैसे भेजे थे, जिसे बुजुर्ग ने लेने से मना कर दिया था। जिला अदालत ने भी इस तर्क को सही मानते हुए पहले बुजुर्ग के खिलाफ फैसला सुना दिया था कि भरण-पोषण केवल भावना हो सकती है, कोई कानूनी शर्त नहीं।