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हिमाचल में बैमौसमी बर्फबारी और ओलावृष्टि बनी विलेन, सेब के पौधे जड़ों समेत उखड़े; फल बनने से पहले मिट्टी में फूल

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 09 Apr 2026 04:13 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में बेमौसमी बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब सहित अन्य फलों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। फ्लावरिंग ...और पढ़ें

HighLights

  1. बेमौसमी बर्फबारी-ओलावृष्टि से हिमाचल में फसलों को नुकसान।

  2. सेब के पेड़ों के फूल झड़े, उत्पादन पर सीधा असर।

  3. बागवानों को 60-70% फसल का नुकसान, मुआवजे की मांग।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में बेमौसमी बर्फबारी और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मौसम के इस बदले मिजाज ने सेब सहित अन्य फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बागवानों का कहना है कि इस बार केवल आगामी सीजन ही नहीं, बल्कि कई सालों की मेहनत और कमाई भी दांव पर लग गई है।

कई क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण पेड़ों पर जमी मोटी बर्फ का भार इतना अधिक हो गया कि पेड़ों की टहनियां और कई जगह पूरे पेड़ ही टूट गए हैं। इन पेड़ों पर लगे फूल और कलियां भी बर्बाद हो गई हैं, इससे इस साल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

फलों की संख्या और गुणवत्ता पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय फलों के पेड़ों पर फ्लावरिंग का दौर होता है। ऐसे में बर्फबारी और तेज बारिश के कारण फूल झड़ने और पौधों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर फलों की संख्या और गुणवत्ता पर पड़ेगा, जिससे बागवानों की आमदनी में भारी गिरावट आ सकती है।

हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम की मार ने किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने सेब को भारी नुकसान पहुंचाया है। 

सेब के पौधों से झड़ गए फूल

पहले ही सर्दियों में सूखे की मार झेल चुके बागवान अब इस नई आपदा से जूझ रहे हैं। प्रदेश के ऊपरी और मध्यम इलाकों में हुई तेज ओलावृष्टि ने सेब की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया है। इस समय सेब के पेड़ों में फ्लावरिंग का दौर होता है, अचानक बदले मौसम और ओलों की मार ने पेड़ों पर लगे फूलों को झाड़ दिया है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ना तय है।

बागवान बोले- 60 प्रतिशत फसल को नुकसान

बागवान पवन ठाकुर, वरुण वर्मा  का कहना है कि कई क्षेत्रों में 60 से 70 प्रतिशत तक फसल को नुकसान हुआ है। पहले पर्याप्त बर्फबारी और बारिश नहीं हुई और अब ओलावृष्टि ने बची उम्मीदों को भी तोड़ दिया है। बागवानी पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

बागवानों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष कमेटी गठित की जाए और प्रभावित किसानों-बागवानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।

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