हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान, सेब के पौधों से झड़े फूल; एंटी हेलनेट भी टूटे
हिमाचल प्रदेश में सर्दियों के सूखे के बाद अब गर्मी में हिमपात और ओलावृष्टि से बागवानों को भारी नुकसान हुआ है। सेब और गुठलीदार फलों की फसलें बुरी तरह प ...और पढ़ें

शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब की फसल हो नुकसान हुआ है।
HighLights
सर्दियों के सूखे के बाद अब गर्मी में हिमपात-ओलावृष्टि।
सेब और गुठलीदार फलों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं।
बागवानों की सालों की मेहनत बर्बाद, करोड़ों का नुकसान।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सर्दियों में सूखे की मार झेल चुके बागवानों पर अब गर्मी में हिमपात व ओलावृष्टि का कहर बरप रहा है। गुठलीदार फलों व सेब की बेहतर फसल के सपने पर इनकी मार भारी पड़ रही है। इससे न केवल सेब के पौधों पर आए फूल ही नहीं झड़े, बल्कि ओलों से बचाने के लिए लगाई एंटी हेलनेट भी टूट गई हैं।
बुधवार को चौपाल, खड़ा पत्थर, ठियोग, कुमारसैन, रोहडू, रामपुर से लेकर ऊपरी शिमला के सभी स्थानों पर भारी ओलावृष्टि हुई है। कई स्थानों पर तो बागवानों की सालों की मेहनत बर्फ के भार से टूट चुकी है। वहीं कुफरी, नारकंडा, खड़ा पत्थर से लेकर अधिकतर स्थानों पर हिमपात हुआ है। पर्यटकों के लिए हिमपात भले ही वरदान है, लेकिन बागवानों को इससे भारी नुकसान पहुंचा है।
सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया
बागवान हरीश चौहान ने कहा कि मौसम की हर साल बागवानों पर मार पड़ रही है। राज्य सरकार को इस दिशा में काम करते हुए उन्हें राहत देने के लिए काम करना चाहिए। ज्यादा बर्फबारी व ओले से वर्तमान सीजन ही नहीं बल्कि सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
सेब की फसल को करोड़ों रुपये का नुकसान
थरोला जिला परिषद वार्ड के पूर्व सदस्य अनिल कालटा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में जुब्बल, कोटखाई, उबादेश, रोहड़ू, ठियोग, चौपाल, रामपुर, विशेषकर शिमला और आसपास के बागवानी क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब की फसल को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
शिमला में वर्षा के साथ गिरे ओले
शिमला शहर में मंगलवार रात लगातार वर्षा होती रही वहीं कुछ समय के लिए ओलावृष्टि भी हुई है। इस कारण शहर में जनजीवन बुधवार को अस्त-व्यस्त रहा। शहर के लोगों को बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर कर्मचारियों को कार्यालय जाने तक में परेशानी हुई। सड़कें खाली थी, वाहनों की जगह इनमें पानी ही भरा था। कई स्थानों पर नालियां व नाले ब्लाक होने के कारण सड़कों व रास्तों में बह रहा था।