विपक्ष का CM सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस, सदन और सार्वजनिक मंच पर झूठ बोलने का आरोप
हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन ...और पढ़ें

शिमला स्थित हिमाचल विधानसभा परिसर के बाहर नारेबाजी करते हुए बढ़ते भाजपा विधायक। जागरण
HighLights
विपक्ष ने सीएम सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस सौंपा।
मुख्यमंत्री पर सदन में भ्रामक बयान देने का आरोप लगाया।
सरकारी योजनाओं में विसंगतियों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होते ही सियासी पारा चढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने पहले विधानसभा परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी की और फिर सदन के भीतर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर पिछले तीन वर्षों से सदन और सार्वजनिक मंचों पर भ्रामक और असत्य बयान देने का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को नियम-75 के तहत विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज मोशन) का नोटिस सौंपा।
सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर माहौल गरमा दिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से पारदर्शिता की अपेक्षा होती है, लेकिन वर्तमान सरकार लगातार तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
कई विसंगतियां उजागर करने का दावा
विपक्ष ने सरकार की प्रमुख योजनाओं को लेकर विस्तृत आंकड़े पेश करते हुए कई विसंगतियां उजागर करने का दावा किया। महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह सम्मान निधि देने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि 35,687 लाभार्थियों और 7.42 करोड़ रुपये के खर्च का गणित मेल नहीं खाता। विपक्ष के अनुसार, वास्तविक मासिक खर्च करीब 5.35 करोड़ रुपये होना चाहिए, जिससे संकेत मिलता है कि लाभार्थियों को सीमित अवधि का ही भुगतान हुआ।
सुख आश्रय योजना और गोबर खरीद पर भी सवाल
इसी तरह, ‘सुख आश्रय योजना’ में 4,131 में से केवल 114 बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण का लाभ मिलने और कृषि योजनाओं में महज 0.18 प्रतिशत किसानों की भागीदारी को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। गोबर खरीद योजना में एक किसान को साल भर में औसतन 862 रुपये मिलने को विपक्ष ने नीतिगत विफलता करार दिया।
जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार की सहायता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हिमाचल को 89 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान दिया, जो मनमोहन सिंह सरकार के 18 हजार करोड़ रुपये की तुलना में कई गुना अधिक है। इसके बावजूद राज्य सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है।
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विज्ञापनों और होर्डिंग्स की सरकार
विपक्ष ने सुक्खू सरकार को विज्ञापनों और होर्डिंग्स की सरकार बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर योजनाएं कहीं भी नजर नहीं आ रही। भाजपा शासनकाल की योजनाओं सहारा, हिम केयर और गृहिणी सुविधा का हवाला देते हुए दावा किया गया कि तब लाखों लोगों को लाभ मिला, जबकि वर्तमान सरकार की योजनाओं का दायरा सीमित है।
जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के हर भ्रामक बयान को सदन में उजागर करते रहेंगे। फिलहाल, इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद सबकी निगाहें विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले पर टिकी हैं, जो इस प्रिविलेज मोशन की दिशा तय करेगा।