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हिमाचल विधानसभा में पेंशनरों की देनदारियों पर तीखी नोकझोंक, CM बोले- भुगतान किया; जयराम ने पूछा- तो धरने पर क्यों बैठे

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 01:36 PM (IST)

हिमाचल विधानसभा में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। मुख्यमंत्री सुक्खू ने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष को जवाब देते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष को जवाब देते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

HighLights

  1. विधानसभा में पेंशनरों के वित्तीय लाभों पर तीखी नोकझोंक हुई।

  2. सीएम सुक्खू ने भुगतान का दावा किया, जयराम ने धरनों पर सवाल उठाए।

  3. पिछली सरकार पर 10 हजार करोड़ से अधिक की देनदारी छोड़ने का आरोप।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वीरवार को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ देने के मामले पर सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक हुई। विपक्ष की ओर से सरकार पर पेंशनरों के लाभ और अन्य देनदारियों के भुगतान में देरी का आरोप लगाया। वहीं, सत्तापक्ष की तरफ से मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा पर इनके नाम पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया। 

सारे भुगतान जल्द होंगे : सीएम

मुख्यमंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान विधायक दीप राज के मूल प्रश्न और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, जनक राज के प्रतिपूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि 67 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनरों के सभी लाभ जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 58 से 67 वर्ष तक की आयु वाले पेंशनरों को सारा भुगतान जल्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी पेंशनरों को पहली तारीख को पेंशन दी जा रही है। 

10 हजार करोड़ की देनदारी थी

उन्होंने कहा कि भाजपा ने जब सत्ता छोड़ी थी तो कर्मचारियों के 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक देनदारी बकाया थी और मौजूदा सरकार इसकी चरणबद्ध तरीके से अदायगी कर रही है।

बकाया दे दिया तो धरना क्यों कर रहे : जयराम

इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि मौजूदा सरकार ने सभी कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया दे दिया है तो वे धरने-प्रदर्शन पर क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार आरडीजी बंद होने के लिए भी केंद्र को दोष दे रही है। उन्होंने कहा कि अभी आरडीजी बंद हुए एक साल ही हुआ है, लेकिन सरकार इससे पहले क्या किया। उस समय इस राशि का भुगतान क्यों नहीं किया। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये का जिक्र करते हैं, लेकिन सरकार आपदा की राशि को वेतन और पेंशन पर खर्च नहीं सकती।

धरना देना लोकतांत्रिक अधिकारी : सीएम

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि धरने पर बैठना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है और वह उन्हें भी प्रशंसा देते हैं कि वह धरने के माध्यम से जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने एक अप्रैल 2023 तक 76767 करोड़ रुपये का ऋण छोड़ा था। उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग का 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां भी छोड़ी गईं। 

उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय केंद्र से आरडीजी में 47 हजार करोड़ रुपये एक जीएसटी प्रतिपूर्ति पर 13 हजार करोड़ रुपये मिले। इसके विपरीत उनकी सरकार को आरडीजी में केवल 17 हजार करोड़ रुपये ही मिले हैं।

राजनीतिक लाभ के लिए पूछते हैं प्रश्न : सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी सदस्य राजनीतिक लाभ के लिए प्रश्न पूछते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सत्ता में आए 3 साल 8 महीने और 23 दिन हुए हैं और इस अवधि में लगातार सुधार के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव देखकर राजनीत नहीं करती, बल्कि जनता की सेवा करती है। 

लखनपाल ने एक महिलाओं का मामला उठाया

उधर, विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एकल नारियों, परित्याक्ता और विधवा महिलाओं के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास योजना से वंचित ऐसी महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं में आवेदन कर सकती है। सरकार प्राथमिकता के साथ उनके आवेदनों पर विचार करेगी।

इससे पहले, मूल सवाल के जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि गत तीन वर्षों में एक अगस्त 2026 तक मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में केवल एक विधवा लाभार्थी को इसका लाभ मिला है। उन्हें आवास निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये की सहायता धनराशि उपलब्ध करवाई गई है।

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