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    'दिल्ली और शिमला पुलिस को भिड़ाना संविधान पर खुला हमला', भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल सुक्खू सरकार पर हुए हमलावर

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 26 Feb 2026 12:05 PM (IST)

    हिमाचल भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने ऊना में राज्य सरकार पर दिल्ली और शिमला पुलिस को भिड़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह संविधान पर खुला हमला ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. दिल्ली-शिमला पुलिस टकराव संविधान पर खुला हमला।

    2. सरकार पर AI समिट आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप।

    3. हिमाचल में कानून व्यवस्था चरमराई, संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन।

    जागरण संवाददाता, ऊना। हिमाचल प्रदेश सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस से राज्य शिमला पुलिस को भिड़ाना संविधान पर खुला हमला है। हिमाचल भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने ऊना में पत्रकार वार्ता में राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में जो घटनाक्रम सामने आया है, वह “ना भूतो ना भविष्यति” जैसा है। 

    उन्होंने कहा कि देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़े एआई समिट प्रकरण में जिन लोगों पर भारत की छवि धूमिल करने के गंभीर आरोप हैं, उन्हें संरक्षण देने के लिए प्रदेश सरकार ने कानून के रखवालों को ही आमने-सामने खड़ा कर दिया। यह अराजकता की पराकाष्ठा है।

    राजनीतिक संरक्षण देने के उद्देश्य से की कार्रवाई

    डॉ. बिंदल ने कहा कि दिल्ली पुलिस विधिसम्मत कार्रवाई के तहत आरोपितों को गिरफ्तार करने हिमाचल आई, लेकिन प्रदेश की पुलिस ने उन पर ही अपहरण का मुकदमा दर्ज कर हाई-वोल्टेज ड्रामा खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक संरक्षण देने के उद्देश्य से की गई। देश की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों को बचाने के लिए यदि सरकार पुलिस बलों को टकराव की स्थिति में ले आए, तो इससे बड़ा संवैधानिक संकट और क्या होगा?

    तीन वर्ष में कानून व्यवस्था चरमराई

    प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि तीन वर्षों से हिमाचल में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। नालागढ़ में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत शरीर मिलने की घटना हो, चंबा में वन अधिकारी पर माफिया का हमला हो, मंडी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मारपीट हो, बिलासपुर ऊना में गोलियां चलने की घटनाएं हों या दलित बालक की निर्मम हत्या सरकार हर मामले में मौन और निष्क्रिय रही है। 

    सरकार संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं कर रही

    डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि संविधान की शपथ लेने के बाद भी सरकार संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि पंचायती राज चुनावों को लेकर चुनाव आयोग द्वारा समयसीमा तय करने के बावजूद सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोग के निर्देशों पर अमल न किया जाए। यह संवैधानिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है।

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    संघीय ढांचे और कानून व्यवस्था पर आघात

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरोपियों के विरुद्ध मामला न्यायालय में है और अंतिम निर्णय न्यायपालिका करेगी। परंतु दो राज्यों की पुलिस को आमने-सामने खड़ा कर देना संघीय ढांचे और कानून व्यवस्था पर आघात है। यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक राज्य के लिए शर्मनाक है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस सरकार की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और प्रदेश में अराजकता, संरक्षणवाद और संवैधानिक अव्यवस्था का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।

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