हिमाचल में बिना बजट स्वीकृति खर्च कर दिए 438 करोड़ रुपये, कैग रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
कैग रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन में गंभीर खामियां उजागर की हैं। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को सदन में कैग रिपोर्ट रखी।
HighLights
सरकार ने 438 करोड़ रुपये बिना बजट स्वीकृति के खर्च किए।
राज्य का कुल कर्ज बढ़कर 1.03 लाख करोड़ रुपये हुआ।
जल शक्ति विभाग और आपदा कोष में गंभीर अनियमितताएं मिलीं।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन में नियंत्रक एवं महा लेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने गंभीर खामियों को उजागर किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश विधानसभा में सोमवार को 2024-25 की विनियोग लेखा रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि सरकार ने बिना बजट प्रविधान के 438 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए।
रिपोर्ट के अनुसार, यह अतिरिक्त खर्च नौ विभिन्न विभागों में किया गया। इस खर्च के लिए न तो पहले से बजट में कोई प्रविधान था और न ही बाद में अनुपूरक बजट के माध्यम से स्वीकृति ली गई।
क्या कहते हैं नियम
नियमों के अनुसार, यदि किसी मद में अतिरिक्त खर्च करना हो, तो पहले विधानसभा से स्वीकृति लेना आवश्यक होता है। कैग ने बजट मैनुअल के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बिना मंजूरी खर्च करना गंभीर अनियमितता है। यह स्पष्ट है कि प्रदेश में बजट प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता है।
कैग ने वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया
कैग की रिपोर्ट में वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक की अवधि के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, उद्योग विभाग की 2018-19 से 2022-23 तक और जल शक्ति विभाग की रिपोर्ट 2019 से 2023 तक शामिल की गई है। इसके अलावा, राजस्व विभाग की 2019 से 2023 तक की अवधि की रिपोर्ट भी दी है। कैग ने सरकार की इस प्रकार की कारगुजारियों को वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
यहां हुआ सबसे अधिक खर्च
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लोक निर्माण, जल शक्ति, कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालय, शिक्षा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास और पशुपालन जैसे विभागों पर अत्यधिक खर्च किया गया। मार्च 2025 में 13.51 करोड़ रुपये इधर-उधर करके व्यवस्था की गई। कैग का तर्क है कि प्रदेश सरकार का यह तरीका भी नियमों के अनुरूप नहीं है।
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प्रदेश का ऋण एक लाख करोड़ के पार
प्रदेश के वित्तीय हालात पर कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य की कुल ऋण देनदारी में 10,966.89 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिससे यह आंकड़ा 1,03,331.91 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पहली अप्रैल, 2024 को ऋण 92,365 करोड़ रुपये था। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024 में 26,622.16 करोड़ रुपये का नया ऋण लिया, जबकि 18,168.80 करोड़ रुपये का ऋण चुकाया। इसके बावजूद, कुल ऋण में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। देनदारियां 8,328.94 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,842.47 करोड़ रुपये हो गईं, जो कि 2,513.53 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्शाती है। शुद्ध देनदारी अप्रैल 2024 में 25,363.84 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2025 तक 27,777.37 करोड़ रुपये हो गई। प्रदेश सरकार ने बाजार से कई दीर्घकालीन ऋण भी जुटाए हैं, जिनमें 550 करोड़, 200 करोड़, 200 करोड़, 150 करोड़, 150 करोड़, 400 करोड़, 200 करोड़, 100 करोड़, 300 करोड़ और 95 करोड़ रुपये के ऋण शामिल हैं। इन ऋणों पर ब्याज दर 8.08 प्रतिशत से लेकर 9.63 प्रतिशत तक रही है।
जलशक्ति विभाग में गंभीर अनियमितताएं
जलशक्ति विभाग के की लघु सिंचाई योजनाओं में 2019-23 की अवधि के अनुपालन लेखा परीक्षा में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। योजनाएं बिना किसी सर्वे के बनीं और लोगों तक पानी भी नहीं पहुंचा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और राज्य योजनाओं के तहत योजना निर्माण, क्रियान्वयन और अनुरक्षण स्तरों पर खामियां पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, 18 योजनाओं में 48.25 करोड़ रुपये के कार्यों को छोटे हिस्सों में बांटकर ई-टेंडर प्रक्रिया से बचा गया। कर्मचारियों की कमी का बहाना बना सिंचाई योजनाओं से 9.79 करोड़ रुपये की संभावित आय के मुकाबले केवल 0.37 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके।
अवैध खनन रोकने पर नियंत्रण कमजोर
वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच खनन व्यवस्था न तो योजनाबद्ध तरीके से संचालित हुई और न ही निगरानी तंत्र मजबूत रहा। इसका प्रभाव राजस्व और पर्यावरण पर पड़ा। पिछले पांच वर्षों में अवैध खनन के सिर्फ 40 हजार से अधिक मामले सामने आए। खनन से कमाई में वृद्धि हुई है, लेकिन इसमें स्थिरता नहीं दिखी। पट्टा आवेदनों के निपटारे में लापरवाही दिखी। 27 खनन पट्टों में 1.81 करोड़ रुपये की कम रायल्टी वसूली गई।
आपदा राहत कोष के उपयोग में गड़बड़ी
राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के तहत निधियों का उपयोग निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं किया गया। वित्तीय प्रबंधन और निगरानी की कमी के परिणामस्वरूप राहत कार्यों में देरी और संसाधनों का दुरुपयोग हुआ। 6.07 करोड़ रुपये प्रशिक्षण और उपकरण खरीद के लिए जारी हुए लेकिन इसका उपयोग ही नहीं किया गया। 122.27 करोड़ रुपये निर्धारित निवेश साधनों में लगाने के बजाय बचत खातों में रखे। कई मामलों में निर्धारित मानकों से अधिक राशि खर्च करने की बात भी सामने आई है।