हिमाचल में भ्रष्टाचार पर IAS अफसर आमने-सामने, मुख्य सचिव ने सीएम सुक्खू को पत्र लिखा; लगाए गंभीर आरोप
हिमाचल के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने चेस्टर हिल भ्रष्टाचार आरोपों पर सफाई देते हुए पूर्व मुख्य सचिवों प्रबोध सक्सेना और आरडी धीमान पर गंभीर आरोप लगाए ह ...और पढ़ें
HighLights
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने खुद को निर्दोष बताया।
पूर्व मुख्य सचिवों पर भ्रष्टाचार, षड्यंत्र के आरोप।
सीएम को पत्र लिखकर सक्सेना को हटाने की मांग।
जागरण टीम, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सोलन स्थित चेस्टर हिल में भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने सफाई दी है और खुद को निर्दोष बताते हुए हिमाचल सरकार के पूर्व तीन मुख्य सचिवों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उच्च अफसरशाही आमने-सामने आ गई है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और आरडी धीमान पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए इन अधिकारियों की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को पत्र लिख प्रबोध सक्सेना को पद से हटाने की मांग की है। संजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और आरडी धीमान की खुद की इंटीग्रिटी डाउटफुल है, ऐसे में वे अधिकारी उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं।
पूर्व मुख्य सचिव के कहने पर दी शिकायत
पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और आरडी धीमान के कहने पर ही उनके खिलाफ चेस्टर हिल मामले को लेकर छोटा शिमला में शिकायत दी गई है, जबकि उसमें कोई सच्चाई नहीं है। छोटा शिमला पुलिस थाना में दर्ज की गई शिकायत पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक है।
तथ्यात्मक रूप से गलत आरोप
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि उन पर तीन एकड़ जमीन लेने का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है। यह जमीन जुलाई 2025 में सरकार की विधिवत अनुमति के बाद ली गई है। कम रेट पर जमीन खरीदने के आरोपों पर संजय गुप्ता ने कहा कि ज़मीन का कलेक्टर रेट 1 करोड़ 10 लाख रुपये था और उनकी ओर से जमीन एक करोड़ 35 लाख में खरीदी गई।
उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार में अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे विनय शर्मा द्वारा की गई शिकायत प्रेरित और वाहवाही लेने के उद्देश्य से की गई है।
चेस्टर हिल में कुछ अनियमितताएं तो रेरा अध्यक्ष ने कैसे दी मंजूरी
संजय गुप्ता ने कहा कि चेस्टर हिल मामले में उनके जो फाइल आई है उन्होंने बिना कोई नया आदेश देते हुए इसमें अपनी राय दी है, जबकि ऑर्डर तत्कालीन संबंधित अधिकारी व वर्तमान वित्त सचिव देवेश कुमार ने दिए हैं, जिन्हें हाई कोर्ट ने भी क्वेश नहीं किया है। अगर चेस्टर हिल में कुछ अनियमितताएं हुई हैं तो रेरा के अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी ने इस प्रोजेक्ट्स को कैसे मंजूरी दे दी, उस पर भी प्रश्न चिह्न उठते हैं।
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मुख्य सचिव का दायित्व सौंपना नहीं आ रहा रास
मुख्य सचिव ने कहा कि उन्होंने बिजली बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए 5 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाकर दिया था जिसे देखते हुए सरकार ने उन्हें मुख्य सचिव का दायित्व सौंपा है जो इन अधिकारियों को रास नहीं आ रहा। एक पूर्व बिजली बोर्ड में अधिकारी ग्रोवर और पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान के खिलाफ 2 एफआईआर पहले ही विजिलेंस में है और अब ईडी ने भी इस मामले की जांच कर रही है।
कुनिहार-नालागढ़ लाइन में नियमों की अवहेलना
उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड में चेयरमैन रहते आरडी धीमान पर 130 करोड़ की लागत वाली कुनिहार-नालागढ़ लाइन में नियमों की अवहेलना हुई थी जिनकी जांच चल रही है। मुख्य सचिव ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्य सचिव और हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना की इंटिग्रिटी डाउटफुल रही है। हिमाचल सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ने भी उनकी इंटिग्रिटी पर सवाल उठाए हैं।