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    HRTC का 2300 करोड़ घाटा: टपकती बसों की छतें, आखिर क्यों बिगड़ी हिमाचल परिवहन निगम की हालत

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 31 Mar 2026 02:04 PM (GMT+05:30)

    हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) का घाटा 2300 करोड़ रुपये पार कर गया है, जबकि बसों की छत टपकने का वीडियो वायरल हुआ है। निगम को हर महीने सरकारी ग्रा ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी प्रबंधन लगातार घाटे में जा रहा है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी प्रबंधन लगातार घाटे में जा रहा है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. HRTC का घाटा 2300 करोड़ रुपये से अधिक हुआ।

    2. टपकती बसों की छत का वीडियो देशभर में प्रसारित।

    3. कर्मचारियों को वेतन-पेंशन मिलने में होती है देरी।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी बस की बारिश में टपकती छत और छाता लेकर गाड़ी चलाते ड्राइवर का वीडियो देशभर में प्रसारित हुआ है। इस वीडियो ने एचआरटीसी प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए हैं। आखिर कैसे एचआरटीसी बसों की हालत इतनी बदहाल कैसे है, सभी लोग यही सवाल कर रहे हैं। 

    सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े उपक्रम हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की वित्तीय हालत खराब होती जा रही है। निगम पर घाटे का बोझ 2300 करोड़ को पार कर चुका है। सबसे बड़ा पीएसयू यानी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग राज्य बिजली बोर्ड है।

    मिलती है मासिक ग्रांट

    निगम पर लोन और ओवरड्राफ्ट भी हर साल बढ़ता जा रहा है। निगम को राज्य सरकार हर महीने 55 से 60 करोड़ की ग्रांट जारी करता है। सालाना 650 से 700 करोड़ के करीब ग्रांट जारी की जाती है।

    वेतन व पेंशन के लाले

    एचआरटीसी में अभी 10853 कर्मचारी काम कर रहे हैं। हालत ये है कि निगम न तो अपने कर्मचारियों को कभी भी 1 तारीख को वेतन नहीं दे पाता। पेंशनरों को तो पिछले दो सालों में कभी भी पेंशन समय पर नहीं मिली। हर महीने 20 तारीख के बाद पेंशन जारी होती है।

    हर साल बढ़ रहा घाटा

    2023 में 31 मार्च तक एचआरटीसी का कुल घाटा 1966 करोड़ था, जो 31 मार्च, 2024 तक बढक़र 2119 करोड़ हो गया। अभी तक यह निगम 2300 करोड़ का घाटा पार कर चुका है।

    घाटे के क्या हैं कारण

    हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम को अधिकांश घाटे के रूट चलाने होते हैं, ताकि लोगों को बस सुविधा दी जा सके। 28 कैटेगिरी हैं, जिन्हें बस किराये में छूट दी जाती है। महिलाओं को 50 प्रतिशत बस किराया में छूट का प्रविधान किया गया है।

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    घाटे के कारण कम हो रही बसें

    निगम के पास 3200 के करीब बसें है। घाटे के कारण निगम अपने फ्लीट को लगातार कम कर रहा है। अभी 297 ई बसों की आपूर्ति करीब छह माह से पेंडिंग है।

    सरकार पर बढ़ रही निर्भरता

    गत सालों में एचआरटीसी प्रबंधन की आय में लगातार कमी आ रही है। अनुदान पर निर्भरता बढ़ी है। सरकार हर साल 733 करोड़ से 750 करोड़ तक की ग्रांट एचआरटीसी को दे रही है। हालात यह हैं कि वेतन और पेंशन देने के लिए भी अनुदान चाहिए होता है।

     

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