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    हिमाचल में बादल फटने के 48 संवेदनशील स्थानों की पहचान, स्वचालित मौसम केंद्र से जारी होगी पूर्व चेतावनी

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 15 Mar 2026 11:48 AM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, आपदा प्रबंधन विभाग ने 48 संवेदनशील स्थानों की पहचान की है। इन जगहों पर स्वचालित मौसम केंद्र ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में बादल फटने से हुआ भारी नुकसान। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में बादल फटने से हुआ भारी नुकसान। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. 48 संवेदनशील स्थानों पर स्वचालित मौसम केंद्र लगेंगे।

    2. पूर्व चेतावनी से आपदा में होने वाला नुकसान कम होगा।

    3. वैज्ञानिक आधार पर वर्षा और भूस्खलन की निगरानी होगी।

    यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में कुछ वर्षों से बादल फटने की घटनाएं बढ़ी हैं। बरसात में प्राकृतिक आपदा से नुकसान कम हो, इसके लिए पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन विभाग ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है। 48 ऐसे संवेदनशील स्थानों का पता लगाया है, जहां कुछ वर्षों से बादल फटने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। अब इन 48 स्थानों पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

    स्वचालित मौसम केंद्र से मिलेगी पूर्व चेतावनी

    अभी तक यह पता लगाना कठिन है कि इन स्थानों पर वर्षा कहां और किन परिस्थितियों में हुई और कितनी हुई। इसका कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं था। अब बहुत अधिक वर्षा, भूस्खलन और अधिक नुकसान वाले स्थानों पर पूर्व चेतावनी व डाटा जुटाने सहित कारणों का पता लगाने के लिए स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

    वैज्ञानिक आधार पर निगरानी बढ़ाई जाएगी

    इससे संवेदनशील क्षेत्रों में वैज्ञानिक आधार पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। इन स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किन परिस्थितियों में अचानक भारी वर्षा होती है और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में पहले से चेतावनी जारी की जा सके।

    बादल फटने का क्या है पैमाना

    मौसम विभाग बादल फटना तभी मानता है जब एक स्थान पर लगभग 100 मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से वर्षा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक वर्षा के कारण इन घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। हिमाचल में छोटे-छोटे जलग्रहण क्षेत्रों और ढलानदार भू-आकृति के कारण बादल फटने की स्थिति में भारी तबाही हो सकती है।

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    ये होगा कार्य 

    विभाग वर्षा का स्तर और माप, भौगोलिक स्थिति, ढलान, नदी-नालों और पिछले आपदा रिकार्ड का अध्ययन कर संवेदनशील क्षेत्रों का डाटाबेस तैयार करेगा। इसके आधार पर स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय पर अलर्ट किया जा सकेगा, ताकि नुकसान कम किया जा सके। वर्षा के वैज्ञानिक आंकड़ों का लगातार संग्रह और विश्लेषण होगा। 

    यह होता है स्वचालित मौसम केंद्र

    स्वचालित मौसम केंद्र एक आधुनिक मौसम मापन प्रणाली होती है, जो बिना मानव हस्तक्षेप के लगातार मौसम से जुड़े आंकड़े रिकार्ड करती है। तापमान, वर्षा, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा जैसे मौसमी आंकड़े स्वतः दर्ज करता है। डाटा को आनलाइन सर्वर या नियंत्रण केंद्र तक तुरंत भेजता है। 24 घंटे निगरानी संभव होती है। इससे अचानक भारी वर्षा या मौसम परिवर्तन की समय रहते जानकारी मिलती है। इन स्टेशनों से मिलने वाले आंकड़े मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को संभावित खतरों का आकलन करने और समय पर चेतावनी जारी करने में मदद करते हैं।

    प्रदेश में 48 स्थानों को चिह्नित किया है, जहां पर स्वचालित मौसम केंद्र लगाए जाएंगे। इससे बरसात में आने वाली आपदा में नुकसान को कम करने के साथ बादल फटने की घटनाओं का पता लगाया जा सकेगा। साथ ही इसके कारणों को जांचा जाएगा।
    - डीसी राणा, विशेष सचिव आपदा प्रबंधन।

    चार वर्ष में आपदा की घटनाएं 

    • वर्ष    बादल फटने    बाढ़    भूस्खलन
    • 2025    47    97    148
    • 2024    12    39    46
    • 2023    27    83    5502
    • 2022    14    45    94

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