IAS अनिल खाची हिमाचल निर्वाचन आयुक्त पद से सेवानिवृत्त, 3 अहम पद हुए खाली; कौन अधिकारी मारेगा बाजी?
हिमाचल प्रदेश के निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त हो गए हैं, जिससे नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति को लेकर चर्च ...और पढ़ें

आईएएस अधिकारी अनिल खाची राज्य निर्वाचन आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हो गए। जागरण आर्काइव
HighLights
अनिल खाची हिमाचल निर्वाचन आयुक्त पद से हुए सेवानिवृत्त।
मुख्य सूचना आयुक्त, जल आयोग अध्यक्ष पद भी खाली।
प्रबोध सक्सेना नए निर्वाचन आयुक्त की दौड़ में आगे।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची बुधवार को पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए। आयोग के कर्मचारियों ने उन्हें विदाई पार्टी दी। खाची की सेवानिवृत्ति के बाद नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना राज्य निर्वाचन आयुक्त की दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी तक सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारियों में से ही राज्य चुनाव आयुक्त लगाया जाता रहा है।
व्यवस्था परिवर्तन भी दिख सकता है
व्यवस्था परिवर्तन के दौर में बदलाव की संभावनाएं भी प्रबल मानी जा रही हैं। सरकार किसी अन्य सेवाओं के अधिकारियों को भी यह पद सौंप सकती है, ऐसी चर्चा भी अधिकारियों में है। सरकार जिसे भी राज्य निर्वाचन आयुक्त बनाएगी उसका कार्यकाल पांच साल का होगा।
तीन अहम पदों पर होनी है तैनाती
निर्वाचन आयुक्त के अलावा मुख्य सूचना आयुक्त व जल आयोग के अध्यक्ष के पद पर भी तैनाती होनी है। जबकि सितंबर महीने में राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी सेवानिवृत हो रहे हैं। प्रदेश जल आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल भी 11 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
कौन बनेगा मुख्य सूचना आयुक्त
पिछले कई महीनों से रिक्त चल रहे मुख्य सूचना आयुक्त (सीआइसी) के पद को भरने के लिए भी प्रक्रिया अंतिम चरण में मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करने वाले किसी गैर-आईएएस चेहरे को यह जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है।
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जल आयोग पर संशय
राज्य सरकार ने सालाना 18,000 करोड़ रुपये का जल उपकर (वाटर सेस) जुटाने के उद्देश्य से जल आयोग का गठन किया था। शुरुआती दौर में सरकार के कुछ उपक्रमों से लगभग 200 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हुआ था। लेकिन इसके बाद 41 जल विद्युत कंपनियों ने इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी। मामला अदालत में लंबित होने के कारण आयोग का कामकाज एक तरह से ठप पड़ा हुआ है। अब 11 अगस्त को आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार आयोग की अवधि आगे न बढ़ाकर इसे निष्क्रिय ही छोड़ सकती है।