हिमाचल में फर्जी एंट्री पास का खेल बेनकाब, बद्दी टोल पर पकड़े कई वाहन; लगा रहे थे 9000 रुपये की चपत
हिमाचल प्रदेश में प्रवेश शुल्क से बचने के लिए कुछ राज्यों के वाहन चालक फर्जी एंट्री पास का इस्तेमाल कर रहे हैं। बद्दी टोल पर ऐसे कई वाहन पकड़े गए हैं, ...और पढ़ें

बद्दी में हिमाचल का एंट्री प्वाइंट, यहां जाली पास लगी गाड़ियां पकड़ी हैं।
HighLights
बद्दी टोल पर फर्जी एंट्री पास का खेल बेनकाब हुआ।
वाहन चालक 9000 रुपये वार्षिक शुल्क बचाने का प्रयास कर रहे थे।
पुलिस ने फर्जी पास के मामलों की जांच शुरू की है।
जागरण संवाददाता, सोलन। हिमाचल प्रदेश में प्रवेश शुल्क से बचने के लिए कुछ अन्य राज्यों के वाहन चालक अब फर्जी एंट्री पास बना रहे हैं। बद्दी स्थित हिमाचल एंट्री टोल प्वाइंट पर टोल कर्मियों ने ऐसे कई वाहनों को पकड़ा है, जिन पर संदिग्ध और कथित रूप से नकली पास लगाए गए थे। मामले सामने आने के बाद संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस थाना बद्दी में शिकायतें दी गई हैं।
9000 रुपये में बनता है वार्षिक पास
हिमाचल प्रदेश में अन्य राज्यों से आने वाली पैसेंजर कारों के लिए प्रतिदिन 100 रुपये एंट्री शुल्क निर्धारित है। वहीं नियमित रूप से आने-जाने वाले वाहन मालिकों के लिए 9,000 रुपये का वार्षिक पास जारी किया जाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग नियमित आवागमन के कारण यह वार्षिक पास बनवाते हैं, लेकिन कुछ शरारती तत्व शुल्क बचाने के लिए वाहनों पर फर्जी पास लगाकर टोल से गुजरने का प्रयास कर रहे हैं।
कैसे हुआ खुलासा
टोल कर्मियों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ वाहनों की विंडस्क्रीन पर लगे पास संदिग्ध दिखाई दिए। जब उनकी बारीकी से जांच की गई तो वे कथित रूप से फर्जी पाए गए। इसके बाद संबंधित वाहन चालकों को रोककर मामले की सूचना कंपनी कार्यालय और पुलिस को दी गई।
क्या कहते हैं प्रबंधक
जेएस इंटरप्राइजेज के प्रबंधक ने बताया कि टोल एंट्री प्वाइंट पर तैनात कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी वाहन पर लगा पास संदिग्ध प्रतीत हो तो उसकी तुरंत जांच की जाए और मामले की जानकारी कार्यालय को दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार पैसेंजर कार के लिए वार्षिक पास का शुल्क 9,000 रुपये तथा दैनिक एंट्री शुल्क 100 रुपये है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए पुलिस को शिकायत दी जाती है।
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क्या कहना है पुलिस का
पुलिस थाना बद्दी के प्रभारी ने बताया कि टोल फर्म की ओर से इस प्रकार की कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हालांकि मौके पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि संबंधित वाहनों पर लगाए गए स्टिकर वास्तविक थे या फर्जी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर सुधार की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की हेराफेरी करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।