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हिमाचल सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी पर क्लीयर किया स्टैंड, कर्मचारियों को डीए की 6 किस्त होंगी जारी

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 26 Aug 2026 06:29 PM (IST)

हिमाचल सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए कोई नई नीति विचाराधीन नहीं है, मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत ही प्रक्रिया जारी है।

हिमाचल विधानसभा परिसर में लोगों से मुलाकात करते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

हिमाचल विधानसभा परिसर में लोगों से मुलाकात करते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

HighLights

  1. स्थानांतरण के लिए कोई नई नीति विचाराधीन नहीं।

  2. OPS कर्मचारियों का 15% महंगाई भत्ता लंबित।

  3. आर्थिक स्थिति सुधरने पर जारी होगा लंबित DA.

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए फिलहाल अलग से कोई नई नीति बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार वर्ष 2013 में जारी वृहद मार्गदर्शी सिद्धांतों के तहत ही स्थानांतरण प्रक्रिया संचालित कर रही है। ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती के प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने बताया कि कर्मचारियों के स्थानांतरण को विनियमित करने के लिए 10 जुलाई 2013 को कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन्हें उच्च न्यायालय के विभिन्न मामलों में पारित आदेशों की अनुपालना और मंत्रिमंडल उपसमिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था।

सरकार ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार इन सिद्धांतों में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। वर्तमान में संशोधित वृहद मार्गदर्शी सिद्धांत पूरी तरह प्रभावी हैं। इनके तहत सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इसलिए अलग स्थानांतरण नीति बनाने की फिलहाल कोई आवश्यकता नहीं है।

आर्थिक स्थिति सुधरते ही मिलेगा डीए लाभ

विधानसभा में सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत कार्यरत कर्मचारियों का कुल 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) लंबित है। विधानसभा में एक विधायक के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होते ही लंबित 6 किस्तों की यह राशि जारी कर दी जाएगी। दूसरी ओर, न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) के तहत कार्यरत कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर वर्तमान में पूरा 60 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है और उनकी कोई भी किस्त बकाया नहीं है। यदि केंद्र और राज्य के डीए में अंतर रहता, तो इन कर्मचारियों के पेंशन खातों में अंशदान कम जमा होता, जिसका सीधा असर उनके भविष्य के पेंशन लाभों पर पड़ता। इसलिए इन्हें केंद्र की तर्ज पर पूरा 60 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है। 

ओपीएस कर्मचारियों को वर्तमान में 45 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जो 15 अक्टूबर 2025 से प्रभावी है। केंद्र की 60 प्रतिशत की दर के मुकाबले इनमें 15 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। लंबित 6 किस्तों में 1 जुलाई, 2023 से 1 प्रतिशत, 1 जनवरी, 2024 से 4 प्रतिशत, 1 जुलाई, 2024 से 3 प्रतिशत, 1 जनवरी, 2025 से 2 प्रतिशत, 1 जुलाई, 2025 से 3 प्रतिशत, 1 जनवरी, 2026 से 2 प्रतिशत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि डीए भुगतान में देरी की मुख्य वजह राज्य की वित्तीय स्थिति है।

 

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