हिमाचल में भूमि लीज नियमों में बड़ा बदलाव: अब 40 साल की सीमा तय, हिमुडा को मिली 80 वर्ष तक छूट
हिमाचल प्रदेश सरकार ने भूमि लीज नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब सामान्यतः भूमि लीज की अवधि 40 वर्ष से अधिक नहीं होगी। हालांकि, हिमुडा को शहरी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बात रखते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।
HighLights
भूमि लीज की अधिकतम अवधि अब 40 वर्ष।
हिमुडा को शहरी विकास हेतु 80 वर्ष की छूट।
राजस्व विभाग ने नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू किए।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भूमि लीज से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। राजस्व विभाग द्वारा जारी इस अधिसूचना के तहत हिमाचल प्रदेश लीज (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब राज्य सरकार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी भूमि की लीज 40 वर्षों से अधिक अवधि के लिए नहीं दे सकेगी।
हालांकि हिमुडा (हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण) के मामलों में विशेष छूट दी गई है, जहां लीज अवधि को अधिकतम 80 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।
लीज नियम में बदलाव करते हुए लागू किया संशोधन
इस संशोधन को हिमाचल प्रदेश लीज नियम, 2013 के नियम-7 में बदलाव करते हुए लागू किया गया है। इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय भूमि के सुनियोजित उपयोग और दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकार ने मांगे थे सुझाव व आपत्तियां
विशेषकर शहरी विकास और आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए हिमुडा को यह अतिरिक्त सुविधा दी गई है। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संशोधन से पहले 17 नवंबर 2025 को मसौदा नियम प्रकाशित किए गए थे, जिन पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित अवधि के भीतर कोई भी आपत्ति या सुझाव प्राप्त नहीं हुआ, जिसके बाद सरकार ने इन नियमों को अंतिम रूप दे दिया।
इसके अलावा, एक अन्य प्रस्तावित संशोधन में नियम-4 के तहत नया प्रविधान जोड़ने की बात कही गई है, जिसमें निजी और गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए आवासीय घरों के निर्माण को लीज नियमों में शामिल करने का प्रस्ताव है। इस पर आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं।
राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव केके पंत द्वारा जारी इस अधिसूचना को भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।