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हिमाचल में सुस्त मानसून ने बढ़ाई चिंता, भाखड़ा समेत अन्य बांधों में जलस्तर कम; उत्तर भारत में हो सकता है बिजली संकट

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Mon, 17 Aug 2026 01:21 PM (IST)

हिमाचल में मानसून की धीमी गति से भाखड़ा, पौंग और नाथपा झाकड़ी जैसे प्रमुख बांधों का जलस्तर काफी घट गया है। इससे उत्तर भारत के राज्यों में बिजली उत्पादन और सिंचाई पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

हिमाचल प्रदेश में धीमे मानसून के कारण अभी बांधों में जलस्तर कम है। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश में धीमे मानसून के कारण अभी बांधों में जलस्तर कम है। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हिमाचल के प्रमुख बांधों में जलस्तर में भारी गिरावट।

  2. बिजली उत्पादन और सिंचाई पर गंभीर असर की आशंका।

  3. उत्तर भारत के राज्यों के लिए बढ़ी चिंता का विषय।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की सुस्त रफ्तार ने उत्तर भारत के राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त वर्षा न होने से हिमाचल की प्रमुख नदियों पर बने बड़े बांध क्षमता के अनुरूप नहीं भर पाए हैं। भाखड़ा, पौंग और नाथपा झाकड़ी जैसे प्रमुख जलाशयों का जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में काफी नीचे है। आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में सिंचाई के साथ उत्तर भारत में बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

भाखड़ा बांध का जलस्तर 65 फीट कम

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार 11 अगस्त को भाखड़ा बांध का जलस्तर 492.17 मीटर था जबकि वर्ष 2025 में इसी अवधि में यह 502.00 मीटर था। पिछले वर्ष से जलस्तर 9.83 मीटर कम है। जलाशय अभी कुल क्षमता से 19.9 मीटर (करीब 65 फीट) कम भरा है।

पौंग बांध 12 मीटर नीचे

ब्यास नदी पर बने पौंग बांध का जलस्तर 411.26 मीटर दर्ज किया गया। इसकी कुल क्षमता 423.67 मीटर है। पिछले वर्ष समान अवधि में जलस्तर 419.365 मीटर था। इस बार 8.105 मीटर की कमी है और बांध क्षमता से 12.41 मीटर नीचे है।

नाथपा झाकड़ी में भी गिरावट दर्ज

नाथपा झाकड़ी परियोजना के जलस्तर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज हुई है। पिछले वर्ष के 1492.08 मीटर के मुकाबले इस बार जलस्तर 1473.65 मीटर रहा, यानी 18.43 मीटर कम। पंडोह डैम में भी पर्याप्त पानी जमा नहीं हो सका है।

बिजली उत्पादन में आ सकती है गिरावट

जलाशयों में पानी की कमी से विद्युत उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसका असर उत्तरी ग्रिड से जुड़े हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है। 

सिंचाई भी हो सकती है प्रभावित

भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड (बीबीएमबी) के बांधों से मानसून के बाद पड़ोसी राज्यों को पानी दिया जाता है। पर्याप्त भंडारण नहीं हुआ तो आगामी रबी सीजन में फसलों की सिंचाई और जल प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सितंबर से दिसंबर के दौरान बांधों के बेहतर भराव से बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ हिमाचल को राजस्व लाभ मिलता है। ऐसे में मौजूदा जलस्तर ने संबंधित विभागों की चिंता बढ़ा दी है।

प्रदेश में पहली जून से अब तक हुई वर्षा 

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के आंकडों के अनुसार पहली जून से 16 अगस्त तक प्रदेश में 465 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है जबकि सामान्य वर्षा 513.5 मिलीमीटर की अपेक्षा नौ प्रतिशत कम है। मानसून का प्रवेश प्रदेश में 30 जून को हुआ और जुलाई में 272.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से केवल छह प्रतिशत अधिक रही। जून में सामान्य से 36 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। अगस्त में अभी तक 128.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई हैं, जो सामान्य से 18 प्रतिशत कम है।

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