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    हिमाचल में सड़क निर्माण से भूस्खलन बढ़ा, सांसद राजीव भारद्वाज ने मांगी हिमालयी राज्यों के लिए विशेष नीति

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 03:17 PM (GMT+05:30)

    हिमाचल में सड़क निर्माण से बढ़ते भूस्खलन का मुद्दा लोकसभा में उठा, जहां सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने हिमालयी राज्यों के लिए वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकू ...और पढ़ें

    सांसद राजीव भारद्वाज ने मांगी हिमालयी राज्यों के लिए विशेष नीति (फाइल फोटो)

    सांसद राजीव भारद्वाज ने मांगी हिमालयी राज्यों के लिए विशेष नीति (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सांसद ने लोकसभा में अंधाधुंध पर्वत कटान का मुद्दा उठाया।

    2. हिमालयी राज्यों के लिए वैज्ञानिक सड़क निर्माण नीति की मांग।

    3. भूस्खलन रोकने को आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर।

    जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण के दौरान हो रहे अंधाधुंध पर्वत कटान और ब्लास्टिंग से बढ़ते भूस्खलन का मामला लोकसभा में गूंजा।

    हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने नियम-377 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से हिमालयी राज्यों के लिए वैज्ञानिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सड़क निर्माण नीति बनाने की मांग की है। विकास जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत हिमालय और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जा सकती।

    डॉ. भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित पूरे हिमालयी क्षेत्र में फोरलेन और अन्य सड़क परियोजनाओं के लिए बड़े स्तर पर पहाड़ों की कटाई और ब्लास्टिंग की जा रही है। इसका असर बरसात के दौरान साफ दिखाई देता है। भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने से सड़कें बार-बार बंद होती हैं और लोगों की जान-माल को खतरा पैदा होता है।

    इसके साथ ही सड़कों की मरम्मत पर सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। हिमाचल की अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी और पर्यटन पर काफी हद तक निर्भर है।

    ऐसे में यदि पहाड़ असुरक्षित होंगे तो इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। सड़क निर्माण के दौरान ऐसी तकनीकों को अपनाना जरूरी है, जिनसे पहाड़ों की अनावश्यक कटाई कम हो और ढलानों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

    परवाणू फोरलेन में टीआरएम तकनीक का दिया उदाहरण

    सांसद ने परवाणू फोरलेन परियोजना में इस्तेमाल की जा रही टर्फ रिइंफोर्समेंट मैट तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे ढलानों को स्थिर करने और भूस्खलन की संभावना कम करने में मदद मिल रही है।

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    उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में हाइड्रोसीडिंग, रॉक बोल्टिंग, मेष रिइंफोर्समेंट, जियोसेल और सॉयल नेलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के व्यापक इस्तेमाल का सुझाव दिया।

    भू-वैज्ञानिक अध्ययन और स्लोप स्टेबिलिटी ऑडिट हो अनिवार्य

    डॉ. भारद्वाज ने केंद्र सरकार से हिमालयी राज्यों के लिए अलग माउंटेन रोड कंस्ट्रक्शन पालिसी बनाने की मांग की। सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन और स्लोप स्टेबिलिटी ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए।

    सड़क निर्माण में पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को परियोजना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। वैज्ञानिक तरीके से सड़क निर्माण होने से भूस्खलन की घटनाओं में कमी आएगी, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और सड़कों के बार-बार क्षतिग्रस्त होने से होने वाले भारी रखरखाव खर्च को भी कम किया जा सकेगा।

    हिमाचल की पर्वतमालाएं केवल प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर हैं। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है।