हिमाचल में निजी भूमि से बांस काटने पर नहीं लगेगी फीस, पेड़ की श्रेणी से भी बैम्बू बाहर; अधिनियम में किया संशोधन
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि निजी भूमि से बांस काटने पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा, क्योंकि इसे पेड़ की श्र ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बांस कटान पर नियमों में बदलाव किया है।
HighLights
निजी भूमि से बांस काटने पर शुल्क नहीं लगेगा।
बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किया गया।
किसानों की धोखाधड़ी के मामलों पर कार्रवाई जारी।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक बिक्रम ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि निजी भूमि पर बांस कटान करने पर कोई फीस नहीं लगेगी। बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि लोग बांस काटकर बाहरी राज्यों में ले जाते हैं, तब इस पर परमिट फीस लगती है।
पटवारी व वन रक्षक इसलिए मौके पर आते हैं, ताकि इसकी जांच की जा सके कि बांस निजी भूमि पर ही काटे जा रहे हैं या सरकारी भूमि पर कटान तो नहीं हो रहा।
सरकार ने किया अधिनियम में संशोधन
भारत सरकार द्वारा भारतीय वन अधिनियम 1927 में संशोधन के बाद निजी भूमि पर उगाए गए बांस को वृक्ष नहीं माना गया है। विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि बांस को वृक्ष की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। इसके बावजूद अभी तक 20 रुपये प्रति क्विंटल फीस ली जा रही है।
12 किसानों ने दर्ज करवाई धोखाधड़ी की शिकायत
लाहुल-स्पीति से विधायक कुमारी अनुराधा राणा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 12 किसानों ने अलग अलग कंपनियों व्यापारियों और आढ़तियों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज करवाई है। इनमें 10 मामलों में से एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 2 मामलों में निरस्त रिपोर्ट तैयार की गई है। 7 मामले अन्वेष्णाधीन है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है। इसके बाद विस्तृत जांच कर साक्ष्य जुटाए जाते हैं और जांच पूरी होने पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान व चार्जशीट पेश की जाती है। न्यायालय में सुनवाई के बाद दोष सिद्ध होने पर आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लाइसेंस या पंजीकरण को निलंबित या रद्द करने का प्रावधान भी किया गया है।