Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हिमाचल में हर तीन में दो मौत की वजह ह्रदयाघात, कैंसर और स्ट्रोक, NHM के अध्ययन ने पेश की गंभीर तस्वीर

    By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 14 Jul 2026 11:04 AM (IST)

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक अध्ययन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में हर तीन में से दो मौतें (67.83%) हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अध्ययन ने चौंकाया है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अध्ययन ने चौंकाया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. हिमाचल में 67.83% मौतें गैर-संचारी रोगों से होती हैं।

    2. मुख्यमंत्री निरोग योजना के क्रियान्वयन में खामियां उजागर हुईं।

    3. स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

    जागरण संवाददाता, शिमला। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के इस साल प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन ने हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। अध्ययन के अनुसार प्रदेश में 67.83 प्रतिशत मौतें यानी हर तीन में से दो मौत ह्रदयाघात, स्ट्रोक, कैंसर, सीओपीडी और अन्य गैर संचारी रोगों के कारण हो रही हैं। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए शुरू की मुख्यमंत्री निरोग योजना के क्रियान्वयन का आकलन करते हुए शोध में पाया कि जमीनी स्तर पर कई स्वास्थ्य कर्मियों को इंटीग्रेटेड निरोग क्लीनिक की गाइडलाइन और कार्यप्रणाली की पर्याप्त जानकारी नहीं है। अध्ययन के मुताबिक इसका असर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने पर पड़ रहा है।

    मुख्यमंत्री निरोग योजना में हुआ अध्ययन

    यह अध्ययन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा हिमाचल में मुख्यमंत्री निरोग योजना के तहत करवाया गया है, जिसे इस वर्ष जर्नल आफ काम्प्रिहेंसिव हेल्थ में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के लिए वर्ष 2024 के दौरान प्रदेश के 51 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, 132 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और 2,748 लाभार्थियों का मूल्यांकन किया गया। 

    उद्देश्य यह जानना था कि गैर संचारी रोगों की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार के लिए तैयार की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है। अध्ययन में पाया गया कि स्वास्थ्य संस्थानों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच व दवाओं की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण में खामियां अब भी बनी हुई हैं। 

    पर गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग का दायरा भी अपेक्षा से कम 

    कई स्वास्थ्य कर्मियों की जानकारी पुराने राष्ट्रीय कार्यक्रम तक सीमित पाई गई, जबकि मुख्यमंत्री निरोग योजना के तहत कैंसर, सीओपीडी, किडनी रोग, मानसिक रोग और अन्य गैर संचारी बीमारियों के एकीकृत प्रबंधन की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, समुदाय स्तर पर गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग का दायरा भी अपेक्षा से कम रहा। शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य कर्मियों के नियमित प्रशिक्षण, विशेषज्ञ डाक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इंटीग्रेटेड निरोग क्लीनिक को और प्रभावी बनाने की सिफारिश की है। 

    वर्ष 2018 में शुरू हुई थी मुख्यमंत्री निरोग योजना 

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री निरोग योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की समय पर स्क्रीनिंग कर हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सीओपीडी और अन्य गैर संचारी बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाकर उपचार उपलब्ध करवाना है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि योजना की अवधारणा मजबूत है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण, निगरानी और विशेषज्ञ सेवाओं को और सुदृढ़ किए बिना इसका पूरा लाभ हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें: हिमाचल बिजली बोर्ड के कर्मचारी 7 बैंकों से ले सकेंगे बीमा कवर, ये 2 बैंक देंगे एक से डेढ़ करोड़ रुपये का लाभ