हिमाचल में फ्री बिजली और सब्सिडी पर नई नीति लाने की तैयारी, बोर्ड ने सर्वे के बाद तैयार किया प्रस्ताव
हिमाचल प्रदेश सरकार मुफ्त बिजली और सब्सिडी नीति में बदलाव की तैयारी कर रही है। राज्य बिजली बोर्ड ने सर्वेक्षण के बाद रिपोर्ट भेजी है, जिसमें एक परिवार ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड मुफ्ट और सब्सिडी में बदलाव की तैयारी में है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
सब्सिडी सीमित करने पर हिमाचल सरकार का विचार।
एक परिवार को दो या चार मीटर तक लाभ।
वित्तीय बोझ घटाने और पारदर्शिता बढ़ाने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में फ्री बिजली व सब्सिडी को लेकर जल्द ही बड़ा फैसला सामने आ सकता है। आगामी बजट के बाद राज्य में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने बिजली मीटरों पर सब्सिडी जारी रहेगी। वर्तमान में सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली के साथ-साथ सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है, अब सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है।
राज्य बिजली बोर्ड ने इस मुद्दे पर एक विस्तृत सर्वेक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि एक परिवार में सीमित संख्या में ही मीटरों पर सब्सिडी दी जाए।
दो या चार मीटर तक ही सब्सिडी की तैयारी
बोर्ड ने प्रस्ताव रखा है कि अधिकतम दो या चार मीटरों तक ही सब्सिडी सीमित की जा सकती है। इससे उन मामलों पर रोक लग सकेगी जहां एक ही परिवार कई मीटर लगवाकर अधिक सब्सिडी का लाभ ले रहे हैं। बोर्ड के सर्वे में सामने आया है कि कई स्थानों पर एक ही नाम पर 40 से अधिक मीटर भी लगे हैं।
सब्सिडी और मुफ्त बिजली
अभी तक राज्य में सभी घरेलू मीटरों पर 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है। इसके अलावा, तय सीमा से अधिक खपत पर भी सब्सिडी का लाभ मिलता है। हालांकि, इस व्यवस्था से राज्य सरकार और बिजली बोर्ड पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है।
बिजली बोर्ड की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव
बढ़ते खर्च के कारण बिजली बोर्ड की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव देखा जा रहा है। नई नीति लागू होने से सरकार के खर्च में कमी आने की उम्मीद है। यदि सब्सिडी को सीमित मीटरों तक बांधा जाता है, तो इससे अनावश्यक लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर अंकुश लगेगा। इससे वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक ही सब्सिडी का लाभ पहुंच सकेगा।
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बजट में घोषणा संभव
आगामी बजट में इस विषय पर बड़ी घोषणा की जा सकती है। सरकार इस नीति को लागू कर बिजली सब्सिडी को अधिक पारदर्शी और लक्षित बनाने की दिशा में कदम उठा सकती है। इससे न केवल वित्तीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि बिजली क्षेत्र में सुधार भी संभव हो सकेगा।