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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हिमाचल सरकार, हजारों शिक्षकों को मिल सकती है बड़ी राहत

Published: Sat, 20 Sep 2025 07:12 PM (IST)Updated: Sat, 20 Sep 2025 07:20 PM (IST)

TET compulsory For Teachers सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है जिससे हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे। ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट का शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य आदेश |
  2. हिमाचल सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका करेगी |
  3. शिक्षा विभाग ने जिलों से शिक्षकों का रिकॉर्ड मांगा |

राज्य ब्यूरो, शिमला। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की नौकरी जारी रखने और पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करना अनिवार्य कर दिया है। इस निर्णय से प्रदेश के स्कूलों में कार्य कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए यह पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए देश भर के अलग-अलग राज्यों द्वारा निवेदन किया गया है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे अन्य राज्यों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार या दाखिल कर दी है। राज्य सरकार भी इस मामले पर जल्द निर्णय लेगी।

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इसको लेकर सभी जिलों से शिक्षकों का रिकार्ड मांगा है। इसमें पूछा गया कि कितने शिक्षक ऐसे हैं जिनके पास टेट नहीं है। सचिव शिक्षा राकेश कंवर ने बताया कि विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को एग्जामिन कर रहा है।

इस मामले को लेकर विधि विभाग से भी राय ली जा रही है। विधि विभाग की राय आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाए या नहीं। एक सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने वाले सभी सरकारी-प्राइवेट शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य कर दिया है।

पांच साल की सर्विस वालों को नहीं आदेश का फर्क

जिन शिक्षकों के सेवानिवृति की आयु में पांच साल से अधिक का समय है, उन्हें यह परीक्षा पास करनी होगी। जिनकी सेवा के केवल पांच साल बचे हैं, उनके ऊपर इस आदेश का फर्क नहीं पड़ेगा। परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों को नौकरी छोड़नी पड़ेगी।

यह है मकसद

इसका उद्देश्य यह तय करना है कि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक न सिर्फ अकादमिक रूप से योग्य हों, बल्कि शिक्षण-प्रशिक्षण की दृष्टि से भी मानकों पर खरे उतरें। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि बिना टेट पास शिक्षक बच्चों की नींव को मजबूत करने में सक्षम नहीं होंगे। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार की यह पहल शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व मानकीकृत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में आंकड़ा सामने आने के बाद यह तय होगा कि कितने शिक्षक सीधे प्रभावित होंगे। सभी श्रेणियों के शिक्षकों को टेट पास करना अनिवार्य है।

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जिलों से आंकड़े आने के बाद होगी तस्वीर साफ

शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत बिना टेट पास शिक्षकों का रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध करवाएं। आंकड़े आने के बाद सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

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