Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 26, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दिव्यांग को 87.60 लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश, 2012 का सड़क दुर्घटना का है मामला

    Updated: Sat, 26 Jul 2025 01:21 PM (GMT+05:30)

    Himachal Pradesh High Court हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने टाटा एआइजी इंश्योरेंस कंपनी को एक सड़क दुर्घटना में 100% दिव्यांग हुए पीड़ित को 87 लाख 60 ह ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर।
    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर।

    HighLights

    1. टाटा एआइजी इंश्योरेंस कंपनी को दिए आदेश
    2. हाई कोर्ट ने कहा, कोई भी धनराशि नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती

    विधि संवाददाता, शिमला। Himachal Pradesh High Court, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने टाटा एआइजी इंश्योरेंस कंपनी को सौ प्रतिशत दिव्यांग को 87 लाख 60 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पीड़ित अभिजीत सिंह ठाकुर पिता की लापरवाही से मोटर वाहन दुर्घटना के दौरान 100 प्रतिशत दिव्यांग हो गया था। मोटर दुर्घटना मुआवजा प्राधिकरण ने 67,88,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

    न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत कोर्ट अपीलीय स्तर पर भी कानून के उद्देश्य को पूरा करने के लिए उचित, निष्पक्ष और पर्याप्त मुआवजा दे सकते हैं। मामले के अनुसार मोटर वाहन से जुड़ी एक दुर्घटना में लगी चोटों और दिव्यांगता के लिए मुआवजे के लिए दावेदार अभिजीत ने अधिनियम की धारा 166 के तहत दावा याचिका दायर की थी। 

    दुर्घटना 14 नवंबर 2012 को सुबह 7.30 बजे नेरवा से लालपानी रोड पर कलारा में हुई थी। वाहन को दावेदार का पिता चला रहा था। वाहन सड़क से उतरकर खाई में गिर गया, जिससे दावेदार को गंभीर चोटें आईं। इससे वह 100 फीसद दिव्यांग हो गया।

    दावेदार लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी जालंधर (पंजाब) में सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम का तृतीय वर्ष का छात्र था। दिव्यांगता के बाद दावेदार अपनी शैक्षिक पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर सका और पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो गया। 

    यह भी पढ़ें- Mandi News: भारी विरोध के चलते 40 मिनट तक गाड़ी में बैठे रहे जगत नेगी, लोगों ने फेंके जूते, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की

    मोटर वाहन दुर्घटना न्यायाधिकरण ने इंश्योरेंस कंपनी को 7.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज सहित 67,88,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस राशि को बढ़ाते हुए कहा कि पीड़ित जो 14 नवंबर 2012 तक मेधावी छात्र था, पैराप्लेजिया के कारण सौ प्रतिशत दिव्यांग हो गया।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- Himachal Govt Loan: वित्तीय संकट में हिमाचल सरकार, ...और ऋण लेने की तैयारी, एक लाख करोड़ पार होगा आंकड़ा

    यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसी स्थिति में दावेदार को अपना शेष जीवन बिस्तर पर लेटकर या कुर्सी पर बैठकर बिताना होगा। उसके शानदार करियर, विवाह और जीवन के अन्य सभी आनंद के अवसर छीन लिए गए हैं। हालांकि कोई भी धनराशि इस तरह के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उपरोक्त नुकसान के लिए उचित और पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।

    यह भी पढ़ें- महिला की IGMC अस्पताल में मौत पर बवाल, बेटा बोला- मुख्यमंत्री कार्रवाई करें नहीं तो कर लूंगा आत्महत्या