Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जयराम ठाकुर पर फिर हमलावर हुए राजस्व मंत्री नेगी, 'नेता प्रतिपक्ष हिमाचल विरोधी; लगातार झूठ बोल रहे'

    By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 19 Feb 2026 04:24 PM (IST)

    राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर तीखा हमला बोला। नेगी ने भाजपा को प्रदेश विरोधी बतात ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. राजस्व मंत्री नेगी ने जयराम ठाकुर को 'प्रदेश विरोधी' कहा।

    2. आरडीजी को हिमाचल की जनता का संवैधानिक अधिकार बताया।

    3. पूर्व भाजपा सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति फिर गरमा गई है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर तीखा पलटवार करते हुए भाजपा को प्रदेश विरोधी करार दिया। नेगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष लगातार झूठ बोल रहे हैं, जबकि राजस्व घाटा अनुदान सरकार का नहीं बल्कि प्रदेश की जनता का अधिकार है।

    सचिवालय में मीडिया प्रतिनिधियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सदन में भाजपा नेताओं से स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या वे हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान मिलने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा।

    उनका कहना था कि प्रदेश के लोग कोई खैरात नहीं मांग रहे, यह उनका हक है। राज्य सरकार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है और इसमें जनता का सहयोग जरूरी है। भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर आरडीजी बहाली के लिए सरकार के साथ चलें।

    पूर्व सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप

    राजस्व मंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पूर्व सरकार को करीब 70 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि मिली, लेकिन उसका समुचित उपयोग नहीं हुआ। भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल में राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के तौर पर 16,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बावजूद प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़ दी गईं।

    उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार को अब तक मात्र 17,000 करोड़ रुपये का ही राजस्व घाटा अनुदान मिला है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा है।

    संविधान में है प्रविधान

    नेगी ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है। इसका उद्देश्य राज्यों के राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना है। यह व्यवस्था वर्ष 1952 से लागू है और पहाड़ी व विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। हिमाचल जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य के लिए यह अनुदान विकास और बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में सहायक रहा है। ऐसे में इसका बंद होना प्रदेश के हितों के विपरीत है।

    यह भी पढ़ें: 'CM सुक्खू का व्यवहार ऐसा नहीं कि उनके साथ कहीं जा सकें', जयराम की नसीहत; RDG का रोना छोड़कर वित्तीय प्रबंधन सुधारें 

    खबरें और भी