हिमाचल के कई लोगों के पास 3 से ज्यादा गाड़ियां, 75 लाख की आबादी वाले पहाड़ी राज्य में कितनी कारें और बाइक?
Himachal Pradesh News, हिमाचल प्रदेश में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रति तीसरे व्यक्ति के पास वाहन है, जिसका मुख्य कारण आय में वृद्धि और ग् ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जागरण आर्काइव
HighLights
हिमाचल में 2026 तक 24.48 लाख वाहन पंजीकृत।
आय वृद्धि, सड़क कनेक्टिविटी से वाहन संख्या बढ़ी।
सड़क सुरक्षा पाठ्यक्रम में शामिल, ई-वाहन प्रोत्साहन।
अनिल ठाकुर, शिमला। लगभग 75 लाख की आबादी वाले हिमाचल की सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश के हर तीसरे व्यक्ति के पास वाहन है। कई लोगों के पास तो दो से तीन वाहन हैं और कइयों के पास तीन से भी ज्यादा गाड़ियां हैं। वर्ष 2016 के बाद वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
2016 में प्रदेश में वाहनों की संख्या 12,37,128 थी, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 21,06,438 हो गई। 20 जनवरी 2026 तक हिमाचल में वाहनों की संख्या 24,48,291 हो गई है।
वाहनों की संख्या बढ़ने का क्या कारण
तीन वर्ष में ही 3.41 लाख नए वाहन पंजीकृत हुए हैं। 11 वर्ष में 12.11 लाख वाहन बढ़े हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने के पीछे लोगों की आय बढ़ना भी एक कारण है व गांव तक सड़क पहुंचना दूसरा कारण है। सरकार अब लोगों को ई-वाहनों के प्रति जागरूक कर रही है।
हिमाचल में कितनी बाइक व कारें
परिवहन विभाग के मुताबिक 62 तरह के वाहन पंजीकृत हैं। बाइक व स्टकूर की संख्या 12,85,182 है। कार 804582, गुड्स कैरियर वाहन 185645, मोटर कैब 42011, कृषि ट्रैक्टर 22309, व्यावसायिक ट्रैक्टर 19722, मोपेड 21586, बस 11226, मैक्सी कैब 12439, थ्री व्हीलर 4749, एंबुलेंस 1607 के अलावा अन्य वाहन पंजीकृत हैं।
हिमाचल में कितने किलोमीटर सड़कें
लोक निर्माण विभाग के अनुसार प्रदेश में 3644 गांव सड़क सुविधा से जुड़ चुके हैं। प्रदेश में कुल 43 हजार किलोमीटर सड़कों की लंबाई है।
वाहन बढ़ने के साथ हादसे भी बढ़े
हिमाचल में वाहन बढ़ने के साथ हादसे भी बढ़ रहे हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि जागरूकता अभियान शुरू किए हैं, जिससे हादसों का ग्राफ कम हुआ है। प्रदेश में वर्ष 2024 में 2156 हादसों में 869 लोगों ने जान गंवाई और 3226 लोग घायल हुए। वर्ष 2025 में 1877 हादसों में 775 लोगों की मौत हुई है, जबकि 2961 लोग घायल हुए हैं। वर्ष 2024 के मुकाबले वर्ष 2025 में 279 हादसे कम हुए हैं। हादसों में 96 मौतें कम होने के साथ 265 लोग कम घायल हुए हैं।
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सड़क सुरक्षा को पाठ्यक्रम का बनाया है हिस्सा
प्रदेश में 18 साल की आयु पूरी होते ही युवा ड्राइविंग लाइसेंस बनाते हैं। हादसे कम करने के लिए अब सड़क सुरक्षा को स्कूलों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है, ताकि युवाओं को सड़क सुरक्षा की जानकारी मिल सके। अगर युवाओं को स्कूल से ही सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाया जाएगा तो वे नियमों के प्रति पहले ही जागरूक होंगे।
लोगों को परिवहन विभाग से जुड़े कार्य जैसे लाइसेंस बनवाना, टैक्स जमा करवाना, वाहनों का पंजीकरण, पासिंग जैसी सुविधा आनलाइन मिलेंगी। वाहन पासिंग के लिए आवेदन आनलाइन होगा तो पासिंग भी मैनुअल नहीं होगी। लाइसेंस की प्रक्रिया भी आनलाइन की जा रही है। मार्च में परिवहन विभाग को पूरी तरह आधुनिक बना दिया जाएगा।
- मुकेश अग्निहोत्री, उपमुख्यमंत्री।
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