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    हिमाचल में राज्यसभा सीट पर सियासी नजरें, भाजपा ने प्रत्याशी को लेकर खोल दिए पते; कांग्रेस में 3 चेहरे चर्चा में

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 18 Feb 2026 12:55 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में 16 मार्च को राज्यसभा सीट के लिए मतदान होगा, जो मौजूदा सांसद के कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हो रही है। कांग्रेस के पास 40 विधा ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. हिमाचल राज्यसभा सीट पर 16 मार्च को मतदान होगा।

    2. कांग्रेस के पास 40 विधायक, भाजपा की रणनीति पर नजर।

    3. प्रतिभा सिंह, आनंद शर्मा, रजनी पाटिल कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार।

    जागरण संवाददाता, शिमला। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के तहत 16 मार्च को हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट पर मतदान होना है। यह सीट वर्तमान सांसद हिंदू गोस्वामी के कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हो रही है। अधिसूचना के अनुसार 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगी, 5 मार्च तक नामांकन भरे जाएंगे और 16 मार्च को मतदान के साथ ही मतगणना भी की जाएगी।

    कांग्रेस प्रत्याशी पर भाजपा की नजर

    चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार भाजपा की रणनीति कांग्रेस के प्रत्याशी पर नजर रखने की है। कांग्रेस किसे उम्मीदवार बनाती है, यह तय होने के बाद ही भाजपा अपना पत्ता खोलेगी। यदि कांग्रेस पिछली बार की तरह किसी बाहरी चेहरे को मैदान में उतारती है, तो भाजपा भी पूरी ताकत से मुकाबले में उतर सकती है।

    भाजपा इंदु गोस्वामी को दोबारा प्रत्याशी बना सकती है। इसके अलावा जिला ऊना के कुटलैहड़ से पूर्व विधायक वीरेंद्र कंवर पर भी दांव खेल सकती है। इसके अलावा हर बार की तरह भाजपा का चौंकाने वाला फैसला भी हो सकता है। 

    पिछली बार भी यही आंकड़ा था

    वर्तमान विधानसभा आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के 28 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन पिछला अनुभव सत्तारूढ़ दल के लिए सबक बना हुआ है। 

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    पिछली बार भी कांग्रेस के पास 40 विधायक थे, भाजपा के 25 और 3 निर्दलीय विधायक थे। इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा और क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया था।

    विपक्षी खेमे में असंतोष उभरा, तो मुकाबला रोचक 

    राज्यसभा चुनाव में मतदान गुप्त मतपत्र से होता है और विधायक वरीयता के आधार पर मतदान करते हैं। ऐसे में छोटी-सी रणनीतिक चूक या असंतोष परिणामों को प्रभावित कर सकता है। भाजपा को उम्मीद है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं और विपक्षी खेमे में असंतोष उभरा, तो मुकाबला रोचक बनाया जा सकता है।

    भाजपा अवसर तलाशने की रणनीति पर चल रही

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन और संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा भी होगा। कांग्रेस के लिए चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना है, जबकि भाजपा अवसर तलाशने की रणनीति पर काम कर रही है।

    16 मार्च को होने वाला यह चुनाव हिमाचल की राजनीति में एक बार फिर सियासी गणित और रणनीति का दिलचस्प मुकाबला पेश कर सकता है।

    कांग्रेस से कौन हो सकता है प्रत्याशी

    कांग्रेस की ओर से पूर्व पार्टी प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। वहीं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा और पार्टी की राज्य प्रभारी रजनी पाटिल को भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है। भाजपा अपना उम्मीदवार कांग्रेस प्रत्याशी के बाद ही उतारेगी।

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