हिमाचल का सरकारी विभाग पेंशनरों से फोन कॉल पर मांग रहा पैन और आधार कार्ड, जरूर बरतें ये 4 सावधानियां
हिमाचल प्रदेश में कोषागार विभाग की नई व्यवस्था से पेंशनर चिंतित हैं। 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों से फोन पर जीवन प्रमाणपत्र के लिए पैन और आधार जैसे ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के पेंशनर्स फोन पर दस्तावेज मांगे जाने से परेशान हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
कोषागार विभाग फोन पर मांग रहा जीवन प्रमाणपत्र।
पेंशनरों में साइबर ठगी का डर बढ़ा।
निजी जानकारी साझा करने से बचें, 1930 पर शिकायत करें।
यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाणपत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) की कोषागार विभाग द्वारा शुरू की गई नई व्यवस्था चिंता का कारण बन गई है। कोषागार विभाग पहली बार फोन काल के माध्यम से पेंशनरों के जीवित होने की पुष्टि कर रहा है। इस प्रक्रिया से कई पेंशनर असमंजस और भय की स्थिति में हैं।
पेंशनरों का कहना है कि फोन पर पैन नंबर और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि काल करने वाला वास्तव में सरकारी कर्मचारी है या कोई साइबर ठग।
नई व्यवस्था की शुरू
अभी तक वर्ष में एक बार जुलाई में सेवानिवृत्त पेंशनधारकों को जीवित प्रमाणपत्र देना होता था। प्रदेश कोषागार कार्यालय ने अब नई व्यवस्था शुरू कर दी है, जिसमें 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों से फोन पर दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
साइबर फ्रॉड अलर्ट के कारण चिंता
बड़ा सवाल यह है कि साइबर ठगी को लेकर चलाई जा रही 1930 फोन सेवा पर स्पष्ट कहा जा रहा है कि किसी को फोन पर अपनी निजी जानकारी न दें। दूसरी तरफ प्रदेश के सभी जिला कोषागारों के तहत चल रहे कोषागारों व उपकोषागार को 80 वर्ष से अधिक आयु के 250-250 पेंशनधारकों की सूची थमाई हुई है। वे अपने जिलों के अलावा दूसरे जिलों के पेंशनधारकों से फोन पर दस्तावेज मांग रहे हैं। पेंशनर संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
क्या कहते हैं पेंशनर संघ के अध्यक्ष
पेंशनर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आत्माराम ने बताया कि अब तक हर वर्ष जुलाई में निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वयं जीवित प्रमाणपत्र जमा किया जाता था। ये सुरक्षित और स्पष्ट व्यवस्था थी, लेकिन फोन पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को लेकर साइबर ठगी की आशंका बढ़ गई है। यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
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प्रदेश में 80 वर्ष से अधिक आयु के साढ़े 17 हजार पेंशनर
प्रदेश में वर्तमान में 80 वर्ष से अधिक आयु के करीब 17,500 पेंशनर हैं। इनके खाते में हर माह पेंशन जारी होती है। पेंशनरों को अलग-अलग जिलों से फोन आने पर वे डरे हुए हैं कि आखिर उन्हें दूसरे जिलों और तहसीलों से फोन पर दस्तावेज क्यों मांगे जा रहे हैं। पेंशनरों का कहना है कि वैसे ही साइबर ठगी के बहुत अधिक मामले आ रहे हैं और लाखों रुपये बैंक खातों से उड़ रहे हैं, इससे उनमें जानकारी देने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
फोन पर दस्तावेज मांगना उचित नहीं है। 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के जीवित होने को लेकर सत्यापन आवश्यक है। इससे पता चल सके कि जिन्हें पेंशन जा रही है वे जीवित हैं या नहीं।
-देवेश कुमार, प्रधान सचिव वित्त।
पेंशनरों के लिए जरूरी सावधानियां
- फोन पर किसी अज्ञात व्यक्ति को पैन, बैंक खाता, ओटीपी या आधार विवरण साझा न करें।
- केवल आधिकारिक कोषागार कार्यालय से पुष्टि होने पर ही जानकारी दें।
- शक होने पर संबंधित जिला कोषागार से स्वयं संपर्क करें।
- किसी भी संदिग्ध काल की सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
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