हिमाचल के 6 विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया बदली, लोक सेवा आयोग करेगा शिक्षक नियुक्ति; विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश
हिमाचल सरकार ने विश्वविद्यालयों में वित्तीय कुप्रबंधन रोकने और भर्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती अब लोक सेवा आयोग करेगा।
वित्तीय कुप्रबंधन रोकने, भर्तियों में पारदर्शिता लाने को उठाया कदम।
गैर-शिक्षण पदों पर साक्षात्कार समाप्त, राज्य चयन आयोग करेगा भर्ती।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वित्तीय कुप्रबंधन को रोकने और भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। पहली बार राज्य में सभी छह विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां करने का जिम्मा लोक सेवा आयोग को सौंपा गया है। एक अन्य मेडिकल विश्वविद्यालय में पहले से ही लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्तियां होती है।
आज राज्य विधानसभा में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया है, जो विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव लाएगा। इस विधेयक के लागू होने से राज्य के युवाओं को निष्पक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे और जनता की गाढ़ी कमाई (सरकारी अनुदान) का सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
सरकार ने भर्तियों में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए अब विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सभी सीधी भर्तियां हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएंगी।
संस्थागत शासन में सुधार होगा
विधेयक के उद्देश्यों में स्पष्ट किया गया है कि सरकार के संज्ञान में वित्तीय कुप्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के अभाव के कुछ मामले आए थे। चूंकि इन शैक्षणिक संस्थानों को राज्य सरकार द्वारा अनुदान के रूप में भारी धनराशि दी जाती है, इसलिए लोक निधियों (पब्लिक फंड) का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया था। इस कदम से संस्थागत शासन में सुधार होगा और राज्य के युवाओं के लिए एक पारदर्शी, निष्पक्ष तथा योग्यता-आधारित भर्ती प्रणाली स्थापित होगी।
अशैक्षणिक पदों पर भी मेरिट
क्लर्क व अन्य गैर-शिक्षण (अशैक्षणिक) पदों पर सभी सीधी भर्तियां हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य भर्ती एजेंसी के माध्यम से होंगी। प्रदेश सरकार ने इस स्तर पर होने वाली भर्तियों के लिए साक्षात्कार प्रणाली को समाप्त किया है।
अंतिम मुहर सरकार की
वित्त समिति की कमान सरकार के पास अब से सभी राज्य विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की अध्यक्षता कुलपति के बजाय सीधे सरकार के वित्त सचिव द्वारा की जाएगी। नए पदों का सृजन करना हो, पदों को भरना हो, या वेतन और भत्तों में संशोधन करना हो, ऐसे सभी वित्तीय मामले सर्वप्रथम वित्त समिति के समक्ष रखे जाएंगे। वित्त समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर विश्वविद्यालयों की कार्यकारी परिषद् या बोर्ड विचार करेगा और उसके बाद उन्हें अंतिम विचार एवं अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इन विश्वविद्यालयों में लागू होगी नई व्यवस्था
इस नए संशोधन विधेयक के दायरे में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालय आएंगे। जिनमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (1970), सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी (2021), हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (2014), हिमाचल प्रदेश कृषि, बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय (1986), तथा अटल आयुर्विज्ञान और अनुसंधान विश्वविद्यालय (2017) शामिल हैं।
