हिमाचल की पहाड़ी सड़कों पर क्यों नहीं थम रहा मौत का सफर, सरकार का क्या है प्लान? चंबा बस हादसे ने उठाए सवाल
चंबा में हुए बस हादसे में सात लोगों की मौत और 11 घायल हुए, जिससे हिमाचल की पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं। सरकार ने रोड सेफ्टी ऑड ...और पढ़ें

चंबा के चुराह में शनिवार सुबह दुर्घटनाग्रस्त हुई बस। जागरण
HighLights
चंबा बस हादसे में सात की मौत, 11 लोग घायल।
हिमाचल में ओवरलोडिंग, खराब सड़कें हादसों के मुख्य कारण।
सरकार ने सड़क सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य करने का कदम उठाया।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश की घुमावदार व संकरी सड़कों पर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को चंबा के तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर निजी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत और 11 लोग घायल हो गए। बस सड़क से अनियंत्रित होकर करीब 100 फीट नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। बड़े हादसों के बाद कमेटियां बनती रहती हैं, रिपोर्ट भी आती हैं, लेकिन हादसे नहीं रुक रहे।
बड़ी बात यह है कि ब्लैक स्पाट भी सुधारे जा रहे हैं। हादसों के प्रमुख कारणों में 90 प्रतिशत से अधिक लापरवाही के मामले सामने आते हैं, जबकि बाकी सड़कों की खराब स्थिति और ओवरलोडिंग होना मुख्य कारण होता है।
इस साल सिरमौर से हुई बस हादसे की शुरुआत
इस साल अब तक हुए बड़े हादसों पर नजर डालें तो तस्वीर भयावह है। नौ जनवरी को सिरमौर के हरिपुरधार में निजी बस हादसे में 14 लोगों की मौत हुई और 68 लोग घायल हुए थे। जांच में सामने आया कि 39 यात्रियों की स्वीकृत क्षमता वाली बस में 82 यात्री सवार थे। जांच रिपोर्ट में ओवरलोडिंग को हादसे का प्रमुख कारण माना गया था। जबकि सड़क की खराब हालत को भी वजह बताया गया।
15 जुलाई को रामपुर ननखड़ी में एचआरटीसी बस दुर्घटनाग्रस्त हुई और इसमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक घायल हुए। एचआरटीसी की तकनीकी जांच में सड़क का संकरा होना व जमीन धंसना हादसे के संभावित कारण बताए गए। मौके पर सड़क की चौड़ाई केवल 2.63 मीटर और बस की चौड़ाई 2.34 मीटर बताई गई यानी दोनों तरफ कुल महज 29 सेंटीमीटर जगह बची थी।
सरकार ने अब बदला तरीका
सिर्फ हादसे के बाद जांच तक सीमित रहने के बजाय सरकार ने जुलाई 2026 में पीडब्ल्यूडी की सड़क परियोजनाओं के लिए स्वतंत्र रोड सेफ्टी आडिट को अनिवार्य करने की नीति की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसका मकसद सड़क तैयार होने के बाद हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले ही डिजाइन, ब्लैक स्पाट और सुरक्षा खामियों को पहचानना है।
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इस वर्ष के बड़े हादसे
26 मार्च को मंडी-पंडोह रोड पर निजी बस व कार की आमने-सामने टक्कर में दो लोगों की मौत हो गई। 4 अप्रैल को कुल्लू-जलोड़ी जोत पर वाहन खाई में गिरा, जिसमें तीन पर्यटकों की मौत व 17 घायल हुए। 3 मई को कांगड़ा के नूरपुर में निजी बस पलटने से 24 लोग घायल हुए। 11 मई को चंबा-चुवाड़ीपर गुजरात से आए पर्यटकों की एसयूवी खाई में गिरने से छह की मौत हो गई व चार घायल हुए। 31 मई को चंबा-साच पास पर टैक्सी खाई में गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई।18 जून को चंबा-मसरुंड मार्ग पर एसयूवी खाई में गिरने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई। 27 जून को रामपुर में दूध ले जा रही पिकअप गिरी, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। 15 जुलाई को रामपुर-ननखड़ी में एचआरटीसी बस हादसा हो गया, इसमें दो की मौत 20 से अधिक घायल हुए। 24 जुलाई को लाहुल से पांगी जा रही सूमो पर पहाड़ दरकने से 13 लोगों की मौत हो गई।
क्रैश बेरियर लगाने के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट मांगा
लोक निर्माण विभाग ने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए क्रैश बेरियर लगाने के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट देने के लिए परिवहन विभाग को लिखा। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों व तीखे मोड़ों को देखते हुए सड़क पर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने व ब्लैक स्पाट्स (दुर्घटना संभावित स्थलों) के सुधार के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत क्रैश बेरियर स्थापित करने पर 6,50,52,000 रुपये की धनराशि खर्च हुई। कुछ वर्षों में कैग (सीएजी) की रिपोर्ट और परिवहन विभाग के अध्ययनों में यह बात बार-बार सामने आई है कि राज्य में होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं तीखे मोड़ पर सुरक्षा घेरा न होने के कारण होती हैं।
सड़क हादसों के आंकड़े
- वर्ष सड़क हादसे मौतें घायल
- 2021 2,404 1,052 3,454
- 2022 2,597 1,032 4,063
- 2023 2,253 889 3,304
- 2024 2,156 869 3,226
- 2025 1,929 789 3,030
- कुल 11,339 4631 17,077
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