विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल में हरियाणा की तर्ज पर खेल नीति बनाने की घोषणा कहां लटकी, क्यों आगे नहीं बढ़ पा रहा पहाड़ का हुनर?

By Ajay AttriEdited By: Rajesh Sharma
Updated: Sat, 29 Aug 2026 12:55 PM (GMT+05:30)

हिमाचल प्रदेश में खेल नीति केवल घोषणाओं तक सीमित है, जिसके कारण राज्य खेल विकास में हरियाणा से काफी पीछे ...और पढ़ें

धर्मशाला का सिंथेटिक ट्रैक और क्रिकेट स्टेडियम।

धर्मशाला का सिंथेटिक ट्रैक और क्रिकेट स्टेडियम।

HighLights

  1. हिमाचल की खेल नीति केवल घोषणाओं तक सीमित, परिणाम नहीं।

  2. हरियाणा ने राष्ट्रमंडल में 11 पदक जीते, हिमाचल पीछे।

  3. बेहतर खेल ढाँचे और प्रशिक्षकों का अभाव मुख्य समस्या।

अजय अत्री, धर्मशाला। हाल ही में ग्लास्गो में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया। हिमाचल के पड़ोसी राज्य हरियाणा ने भारत के लिए कुल 11 पदक जीते। कई राज्यों के खिलाडि़यों ने मिलकर भारत की झोली में 39 पदक डाले, लेकिन अफसोस कि 122 सदस्यीय भारतीय दल में कोई हिमाचली खिलाड़ी नहीं था। राष्ट्रमंडल में खेलों की संख्या कम करके आठ कर दी गई थी। इस वजह से हमीरपुर से भारोत्तोलक विकास ठाकुर और ऊना के स्टार पैरालिंपियन निषाद को नहीं ले जाया गया था। मान लिया कि इस बार राष्ट्रमंडल में कम प्रतिस्पर्धाएं होने के कारण निषाद और विकास ठाकुर को नहीं ले जाया गया तो क्या और कोई अन्य खिलाड़ी नहीं था?

वर्षों से नई खेल नीति का इंतजार

विभिन्न मंचों से हिमाचल में खेलों की बेहतरी का दम भरने वाले नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि जिस हरियाणा की तर्ज पर हम हिमाचल में नई खेल नीति लाने की बात करते हैं वह आखिर कब आएगी। एक ओर हरियाणा के चार खिलाडि़यों को एक साथ अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया जाता है वहीं इस सूची में हिमाचल का एक भी खिलाड़ी न होना इस बात की तसदीक है कि हम अपने पड़ोसियों से कितना पीछे हैं। जब तक खिलाडि़यों को बेहतर खेल ढांचा और गुणी प्रशिक्षकों की सुविधा नहीं मिलेंगी तब तक परिणाम की उम्मीद न ही रखें तो बेहतर है।

गंभीर प्रयास का अभाव

नीति नियंताओं की ओर से प्रदेश में खेल के उत्थान को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे। चाहे सरकार कोई भी हो, हर साल सरकार बंधा बंधाया बजट दे देती है लेकिन वो कहां जाता है या कैसे खर्च होता है उसकी पारदर्शिता नहीं। खेल संघों की खेल को बढ़ावा देने में भूमिका न के बराबर है। खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि हिमाचल की जलवायु यूरोप की तरह फर्राटा धावक तैयार करने के उपयुक्त है लेकिन अभी तक यहां से एक भी धावक राष्ट्रमंडल या एशियाई खेलों में स्वर्ण नहीं जीत सका है। सिर्फ 1986 सियोल एशियाई खेलों में 3000 मीटर दौड़ में सुमन रावत कांस्य पदक जीत पाई थीं। उनके बाद चंबा की सीमा ही हिमाचल की पहचान बनाए हुए हैं। वहीं अगर पुरुष वर्ग में  देखा जाए तो अमन सैणी ने कई बार राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिमाचल को स्वर्ण दिलाया है लेकिन उनकी विरासत को कोई एथलीट आगे नहीं बढ़ा पाया।

खेल छात्रावास 

हिमाचल में साई के मुख्यत: धर्मशाला, बिलासपुर और हमीरपुर में तीन नेशनल सेंटर आफ एक्सीलेंस (एनसीओई) और ट्रेनिंग सेंटर हैं। वहीं दो राज्य खेल छात्रावास बिलासपुर और ऊना में हैं। इसके अलावा 11 से 12 खेल छात्रावास स्वीकृत और संचालित हैं। इनमें खिलाडिय़ों को दी जा रही सुविधाओं की पड़ताल की जाए तो पता चलता है कि बजट के अभाव में जैसे-तैसे चल रहे हैं। कई खेलों के कोच भी नहीं हैं। ऊना खेल छात्रावास और प्रदेश के एकमात्र बास्केबाल खेल छात्रावास पपरोला की हालत भी बहुत अच्छी नहीं। इसके अलावा शिक्षा विभाग के तहत स्कूल स्तर के खिलाडिय़ों के लिए पांच खेल छात्रावास हैं। इनमें भी अधिकतर की हालत चिंताजनक है। नादौन स्कूल का हास्टल में जैसे तैसे चल रहा है। यह हाकी की प्रतिभाओं को तराशने के लिए बनाया गया था। इसके अलावा शिमला के मतियाणा में वालीबाल, रोहड़ू में फुटबाल खेल छात्रावास नाहन के माजरा में लड़कियों के लिए बनाए गए खेल हास्टल की हालत भी अच्छी नहीं कही जा सकती।

हिमाचल के सितारे

हिमाचल की कई प्रतिभाओं ने देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। जैसे ऊना के स्टार पैरालिंपियन निषाद कुमार, हमीरपुर के बड़सर (हरसौर) के शूटर विजय, पटनौण से भारोत्तोलक विकास ठाकुर, पांवटा से शूटर समरेश जंग उनकी पत्त्नी अनुजा जंग, ऊना से पूर्व हाकी खिलाड़ी दीपक ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी  खिलाड़ी पदमश्री अजय ठाकुर। कबड्डी खिलाड़ी गोपी, मनीषा, पुष्पा, कविता ठाकुर, प्रियंका नेगी, रितु नेगी, चंबा की धावक सीमा। इनमें शूटर विजय, भारोत्तोलक विकास और चंबा के हाकी खिलाड़ी वरुण ने प्रदेश से बाहर अपनी प्रतिभा को निखारा जबकि बाकी खिलाड़ियों ने प्रदेश में रहकर ही सफलता हासिल की।

खेल संघों की कार्यप्रणाली

खेल संघों की कार्यप्रणाली पर जब-तब सवाल उठाए जाते रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में 43 के करीब खेल संघ हैं। इनमें से करीब 23 ऐसे हैं जो सरकार से मदद ले रहे हैं। ज्यादातर खेल संघ नाम भर के हैं। खेल संघों को दी जाने वाली आर्थिक मदद भी पर्याप्त नहीं कही जा सकती। वहीं बहुत से संघ आर्थिक मदद नहीं लेते। कागजी कार्रवाई और देर से राशि मिलने के कारण आवेदन ही नहीं करते हैं।

यह भी पढ़ें: दिल्ली से हिमाचल प्रदेश का हवाई सफर हुआ सस्ता, मात्र 3000 रुपये में मिल रहा टिकट