हिमाचल में खनन कार्यों के लिए बनेगा अलग विभाग, CM ने नदियों की ड्रेजिंग और माइनिंग से कमाई का प्लान बताया
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल में खनन कार्यों के लिए अलग विभाग बनाने की घोषणा की है। उनका कहना ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में जवाब देते सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।
HighLights
खनन कार्यों के लिए अलग विभाग का गठन होगा।
नदियों की ड्रेजिंग से हजारों करोड़ की आय संभव।
रॉयल्टी को लेकर केंद्र से राज्य का मतभेद।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में खनन कार्यों के लिए अलग से विभाग का गठन किया जाएगा। अभी तक यह कार्य उद्योग विभाग का खनन विंग करता है, लेकिन इसमें कार्यों की अधिकता के चलते अलग से विभाग बनाने पर मंथन हो रहा है। उन्होंने कहा कि नदियों में सिल्ट की बढ़ती समस्या से निपटारे के लिए ड्रेजिंग के कुछ कार्यों को वन विभाग को सौंपा गया है।
आगे वन निगम के माध्यम से इसे करवाया जा रहा है। लेकिन अपना स्वतंत्र विभाग बनने से सभी कार्य खनन विभाग से होंगे और इससे 3000 करोड़ रुपये तक की आय का अनुमान है।
वह वीरवार को विधानसभा में विधायक सुरेंद्र शौरी के मूल प्रश्न और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, विधायक बिक्रम ठाकुर, राकेश जम्वाल के प्रतिपूरक सवाल का जवाब दे रहे थे।
माइनिंग से बहुत आय संभव
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल से पांच नदियां बहती हैं, जबकि उत्तराखंड में दो ही नदियां हैं और वहां पर माइनिंग से 300 से 400 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में इससे बहुत आय हो सकती है और प्रदेश आत्मनिर्भर बन सकता है।
नितिन गडकरी से सुझाव पर ड्रेजिंग कार्य किया शुरू
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आई आपदा के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिमाचल दौरे पर नदियों की ड्रेजिंग का सुझाव दिया था। इसके बाद उद्योग विभाग ने इस दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार से यह मामला उठाया था। केंद्र की अनुमति के बाद कुल्लू जिले में तीन साइट पर ड्रेजिंग का कार्य शुरू किया था।
रॉयल्टी पर हुई बात
उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के साथ उनकी हाल ही में वर्चुअल बैठक हुई थी, जिसमें ड्रेजिंग पर चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा कि इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि ड्रेजिंग का मेटीरियल सड़कों में इस्तेमाल करेंगे, लेकिन रायल्टी नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि रायल्टी राज्य का हक है।
बीबीएमबी के डिसिल्टिंग टेंडर पर आपत्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रेजिंग के लिए तीन लोगों ने ऑक्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ठेकेदार को फार्म दिए और फिर कार्य किया। उन्होंने कहा कि डैम की डिसिल्टिंग के लिए बीबीएमबी ने टेंडर लगाए थे और फिर राज्य सरकार ने कहा कि वे ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि जमीन हिमाचल सरकार की है।
उन्होंने कहा कि वन निगम को ड्रेजिंग का अधिकार माइनिंग से मिला है। उन्होंने कहा कि वे 10 सितंबर से दिल्ली दौरे पर रहेंगे और इस दौरान इस मामले को केंद्रीय मंत्रियों से उठाएंगे।
ड्रेजिंग पॉलिसी बनाई
इससे पहले मूल सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ड्रेजिंग और माइनिंग अलग-अलग हैं। राज्य सरकार ने ड्रेजिंग पॉलिसी बनाई है और इसमें जो मेटीरियल एकत्र होगा, उसकी ऑक्शन होगी। उन्होंने कहा कि पुराने हिमाचल में नदी-नालों के मैटीरियल की एफसीए करवानी होती है।
74000 टन मेटीरियल निकाला
उन्होंने कहा कि अभी तक ड्रेजिंग में 74000 टन मेटीरियल निकाला है और एम फार्म से पैसा जमा करवाया है। उन्होंने कहा कि अभी माइनिंग में रायल्टी में 350 करोड़ रुपए की आय हो रही है।
जयराम बोले- सरकार का आपदा में अवसर
इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने आपदा में अवसर तलाशा है। उन्होंने कहा कि ब्यास नदी में बड़ी-बड़ी मशीनें बीच में माइनिंग कर रही हैं। इसे करने वाले कौन लोग थे। साथ ही पूछा कि जो मेटीरियल निकाला, वह कहां गया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने यह मेटीरियल निकाला, उन्होंने उसे बेच दिया और इसमें कई करोड़ों का घोटाला सरकार ने इसमें किया है।
बिक्रम और राकेश जम्वाल ने उठाए सवाल
विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जब खनन का कार्य उद्योग विभाग का खनन विंग करता है तो वन विभाग को इस कार्य को देने की जरूरत क्या पड़ गई। उन्होंने कहा कि इनके लिए एम फार्म किसने जारी गया। वहीं, विधायक राकेश जम्वाल ने कहा कि ब्यास नदी पर बीएसएल प्रोजेक्ट बना है और वहां पर भी ड्रेजिंग होती है और इस कारण वहां से सिल्ट निकालकर सुकेती खड्ड में डाला जाता है और इससे पूरी बल्ह वैली खराब हो रही है।
ठेकेदार ही निकालेगा और ठिकाने भी लगाएगा, सरकार को रॉयल्टी मिलेगी
इस पर, उद्योग मंत्री ने कहा कि जितने भी डैम साइट हैं, वह सारी सिल्ट से भर रही हैं और इससे परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग से जो सिल्ट निकल रही है, वह सौ फीसदी इस्तेमाल नहीं हो सकती। इस कारण इसमें खर्च ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए ठेकेदार को काम देते हैं और वही निकालेगा और इसको ठिकाने भी लगाएगा और सरकार इसकी रायल्टी लेगी। उन्होंने कहा कि पनबिजली परियोजनाओं को इसे खुद ही निकालना होगा।
