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'शिमला की ग्रीन बेल्ट में अवैध कंक्रीट का जाल', हाई कोर्ट का स्वत: संज्ञान; सरकार को नोटिस, मिलीभगत की आशंका जताई

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Thu, 20 Aug 2026 06:55 PM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने शिमला में ग्रीन बेल्ट पर हो रहे अवैध निर्माण पर स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने  सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई।

शिमला की ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। प्रतीकात्मक फोटो

शिमला की ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने शिमला ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर संज्ञान लिया।

  2. अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका, जांच के आदेश दिए गए।

  3. निर्माण रोकने और भूमि की प्रकृति जांचने के निर्देश।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला के बालूगंज और चक्कर-टुटू क्षेत्र के बीच हरे-भरे क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट) में हो रहे अंधाधुंध और अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चक्कर निवासी वाईआर डढवाल द्वारा भेजे पत्र के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।

अदालत ने कहा कि शिमला के एक प्रमुख व्यवसायी द्वारा पेड़ों को काटकर और वन भूमि पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर किए जा रहे इस बड़े निर्माण में वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता या मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता।

तुलनात्मक रिकॉर्ड से खुलासा

याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को सौंपे दस्तावेजों और गूगल मैप्स के तुलनात्मक रिकॉर्ड से पता चला है कि वर्ष 2015 से 2019 के दौरान यह पूरा इलाका पूरी तरह से एक सघन ग्रीन बेल्ट (हरियाली क्षेत्र) था। लेकिन वर्ष 2025 के गूगल मैप और हालिया तस्वीरों में यहां दो बड़ी-बड़ी इमारतों का ढांचा खड़ा दिखाई दे रहा है, जो पांच से छह मंजिला तक ऊंचा हो चुका है।

हरे पेड़ों को काटा, मलबे की डंपिंग

कोर्ट में पेश की तस्वीरों से साफ हुआ है कि लोअर चक्कर-टुटू रोड से इस निर्माण स्थल तक एक अवैध सड़क का निर्माण किया है। इस प्रक्रिया में कई हरे पेड़ों को काटा और बड़े पैमाने पर जंगलों में मलबे की डंपिंग की। इस मलबे का बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक कार्ट रोड तक पहुंच गया है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि जिस तरह सड़क पर पेड़ों को असुरक्षित छोड़ दिया है वे आने वाले समय में सबसे पहले जमींदोज होंगे।

मंजूरी ली या नहीं

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव को आदेश दिए हैं कि वह वन विभाग के आला अधिकारियों और नगर निगम शिमला के आयुक्त के साथ मिलकर तुरंत विवादित स्थल का संयुक्त निरीक्षण करें। फिर अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करें कि क्या इस पांच से छह मंजिला इमारत और सड़क के निर्माण के लिए नगर निगम से कोई मंजूरी ली थी या नहीं। 

यह भी जांच की जाए कि जमीन की मूल प्रकृति क्या है और क्या यह वन भूमि का हिस्सा है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि निरीक्षण के दौरान निर्माण से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां और स्वीकृतियां नहीं पाई जाती हैं, तो तुरंत प्रभाव से सारा निर्माण कार्य रोकने के आदेश जारी किए जाएं। मामले की सुनवाई 14 सितंबर को होगी।

शिमला में 17 प्रमुख ग्रीन एरिया बेल्ट

राजधानी शिमला में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए 17 प्रमुख ग्रीन बेल्ट अधिसूचित हैं। इन क्षेत्रों का कुल क्षेत्रफल करीब 414.36 हेक्टेयर है। इनमें जाखू सबसे बड़ा ग्रीन एरिया है, जिसका क्षेत्रफल करीब 117.52 हेक्टेयर है। इसके अलावा भराड़ी-शांकली-रुलदू भट्टा, फागली-लालपानी, समरहिल, खलीनी-छोटा शिमला, बेमलोई और संजौली चौक प्रमुख ग्रीन बेल्ट हैं। ग्रीन बेल्ट में बैरियर, नाभा, हिमलैंड, छोटा शिमला, कसुम्पटी, चार्ली विला, हिमफेड-आईसीएआर परिसर, बैनमोर, बोइलॉऊगंज और एलिसियम हिल भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर विशेष प्रतिबंध लागू हैं। 

इसके बाद शिमला डेवलपमेंट प्लान में रिट्रीट, मशोबरा बैंड, आंद्री के विभिन्न क्षेत्र, ताल-गिरी, डीपीएफ खलीनी, बीसीएस मिस्ट चैंबर और परी महल जैसे अतिरिक्त क्षेत्रों को भी ग्रीन बेल्ट में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों को शहर के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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