'वित्तीय तंगी या जांच का बहाना बना भुगतान नहीं रोक सकती सरकार', हिमाचल हाई कोर्ट का कड़ी टिप्पणी के साथ आदेश
हिमाचल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार वित्तीय तंगी या सतर्कता जांच का बहाना बनाकर निजी अस्पतालों के स्वीकृत बिलों का भुगतान नहीं रोक सकती। ...और पढ़ें

हिमाच प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
सरकार वित्तीय तंगी या जांच का बहाना नहीं बना सकती।
निजी अस्पतालों के स्वीकृत बिलों का भुगतान तुरंत करे।
यह संविधान के अनुच्छेद 300(ए) और 21 का उल्लंघन।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार वित्तीय तंगी या सतर्कता जांच का बहाना बनाकर निजी अस्पतालों के पहले से स्वीकृत और सत्यापित बिलों के भुगतान को नहीं रोक सकती। अदालत ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300(ए) (संपत्ति का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) का उल्लंघन माना है।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने मैसर्स मातृ मेडिसिटी एंड आर्थोकेयर हास्पिटल तथा 33 अन्य निजी अस्पतालों द्वारा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ दायर 34 कनेक्टेड रिट याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
कई वर्ष से नहीं किया वैध बिलों का भुगतान
याचिकाकर्ता सभी निजी अस्पताल केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत और राज्य सरकार की हिमकेयर में शामिल हैं। इन अस्पतालों का आरोप था कि उन्होंने दोनों योजनाओं के तहत हजारों गरीब मरीजों का निश्शुल्क इलाज किया है, लेकिन सरकार उनके वैध दावों और स्वीकृत बिलों का भुगतान कई वर्ष से नहीं कर रही है। इससे अस्पतालों का दैनिक कामकाज और नकद प्रवाह ठप होने की कगार पर है। सुनवाई के दौरान दोनों सरकारों और स्वास्थ्य विभाग ने दलीलें दीं, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
सरकार ने दिया है भुगतान न करने का आदेश
राज्य सरकार ने अदालती आदेश को दरकिनार करते हुए 30 मई 2026 को एक पत्र जारी कर आदेश दिया था कि निजी अस्पतालों द्वारा जमा किए हिमकेयर बिलों में धोखाधड़ी की आशंका को देखते हुए विजिलेंस ब्यूरो जांच कर रहा है। जांच पूरी होने तक किसी भी निजी अस्पताल को एक भी रुपये का भुगतान न किया जाए।
अब वादे से नहीं मुकर सकती सरकार
कोर्ट ने सरकार के रवैये को कल्याणकारी राज्य के सिद्धांतों का मजाक बताते हुए कहा कि राज्य सरकार साल 2018 से योजना की शर्तों और सीलिंग लिमिट से वाकिफ थी। अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बाद सरकार अब यह बहाना बनाकर वादे से नहीं मुकर सकती कि यह योजना उसके लिए अव्यावहारिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल याचिकाकर्ता अस्पतालों के ही ₹11,03,10,597 रुपये के स्वीकृत बिल विभाग के पास लंबित हैं।
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तुरंत भुगतान करे सरकार
हाई कोर्ट ने आदेश दिए कि आयुष्मान भारत योजना के तहत जो बिल सक्षम प्राधिकारियों द्वारा स्वीकृत किए जा चुके हैं, उनका पूरा बकाया भुगतान राज्य सरकार तुरंत जारी करे। हिमकेयर योजना के तहत (विशेषकर सितंबर 2024 के बाद से जारी मरीजों के डायलिसिस के निरंतर मामलों सहित) सभी लंबित स्वीकृत बिलों की राशि को बिना देरी के अस्पतालों के खातों में ट्रांसफर किया जाए।
कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिए कि बिलों के तेजी से सत्यापन के लिए, जो अतिरिक्त डाक्टरों की टीम लगाई गई है, वे इस कार्य को समयसीमा के भीतर पूरा करें।