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    'नई भर्ती पर पुरानी तदर्थ सेवा का पेंशन लाभ नहीं मिलेगा', हिमाचल हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए सुनाया आदेश

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 05 Jul 2026 11:57 AM (IST)

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नई चयन प्रक्रिया से नियुक्त कर्मचारी पिछली तदर्थ सेवा को पेंशन या वेतन वृद्धि के लाभों के लिए नहीं जोड़ स ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जारगण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जारगण आर्काइव

    HighLights

    1. नई नियुक्ति पर पुरानी तदर्थ सेवा का लाभ नहीं मिलेगा।

    2. पेंशन या वेतन वृद्धि के लिए दावा मान्य नहीं होगा।

    3. हिमाचल हाई कोर्ट ने देशराज की अपील खारिज की।

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सेवा नियमों से जुड़े एक मामले में निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति नई चयन प्रक्रिया के तहत फ्रेश बेसिस पर होती है, तो वह अपनी पिछली तदर्थ सेवा अवधि को पेंशन या वेतन वृद्धि के लाभों के लिए जोड़ने का दावा नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जब पुरानी सेवा नियमित नहीं हुई हो और नई नियुक्ति अलग प्रक्रिया से हुई हो, तो ऐसी स्थिति में पुरानी सर्विस का कोई लाभ नहीं दिया जा सकता। 

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने देशराज की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए पारित किया।

    89 दिन के लिए दी थी बतौर जेबीटी सेवाएं

    याचिकाकर्ता देशराज को 12 मार्च 1981 को शिक्षा विभाग में 89 दिन के लिए जेबीटी शिक्षक के रूप में तदर्थ आधार पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 1996 में उन्होंने शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित बैचवाइज चयन प्रक्रिया में भाग लिया। 31 मई 1996 को उन्हें शास्त्री शिक्षक के पद पर नई नियुक्ति दी गई। 

    वेतन वृद्धि व लाभ की मांग

    उठाई थी याचिकाकर्ता का दावा था कि उनकी 12 मार्च 1981 से 31 मई 1996 तक की तदर्थ सेवा को नियमित मानकर पेंशन, वेतन वृद्धि और एरियर का लाभ दिया जाए। राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की सेवाओं को कभी भी नियमित नहीं किया गया था। 

    हाई कोर्ट ने की टिप्पणी

    हाई कोर्ट की खंडपीठ ने रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता अदालत के समक्ष अपना नियुक्ति पत्र या कोई ऐसा नियम पेश करने में विफल रहा जो उसे पुरानी तदर्थ सेवा का लाभ देने का अधिकार देता हो। अदालत ने सिंगल जज बेंच के पुराने फैसले को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी।

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