'20 साल सेवाओं के बाद भी नियमित न करना मनमाना और भेदभावपूर्ण', हिमाचल हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हिमाचल हाई कोर्ट ने 20 साल की सेवा के बाद कर्मचारी को नियमित न करने को मनमाना और असंवैधानिक बताया। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
20 साल सेवा के बाद नियमित न करना मनमाना, भेदभावपूर्ण।
राज्य सरकार 'आदर्श नियोक्ता' की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
सुनील कुमार को याचिका तिथि से सभी लाभों सहित नियमित करें।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी से 20 वर्ष तक लगातार सेवा लेने के बाद भी उसे नियमित न करना मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। राज्य सरकार 'आदर्श नियोक्ता' होने के नाते अपनी इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने याचिकाकर्ता सुनील कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए खेल विभाग को आदेश दिया है कि उन्हें याचिका दायर करने की तिथि से सभी परिणामी लाभों के साथ पंप आपरेटर के पद पर नियमित किया जाए।
2000 रुपये मानदेय पर की थी तैनाती
सुनील कुमार को वर्ष 2005 में इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर शिमला में ₹2,000 रुपये मानदेय पर पंप आपरेटर-कम-इलेक्ट्रीशियन नियुक्त किया था, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया। खेल विभाग के प्रशासनिक विंग और उपनिदेशक ने वर्ष 2015-16 में सुनील कुमार को नियमित करने की सिफारिश की थी। वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर सहमति देने से इन्कार किया था।
नियमित पद स्वीकृत नहीं
सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि स्पोर्ट्स कांप्लेक्स कोई सरकारी विभाग नहीं, बल्कि 'मैनेजिंग कमेटी' चलाती है। इसलिए कर्मचारी को सरकारी तौर पर नियमित नहीं किया जा सकता। वहां पंप ऑपरेटर का कोई नियमित पद स्वीकृत नहीं है।
जरूरत थी तभी काम पर रखा
कोर्ट ने साफ किया कि इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण राज्य सरकार ने किया है और यह सरकारी संपत्ति है। केवल राज्यपाल की अधिसूचना से बनी मैनेजिंग कमेटी द्वारा संचालित होने से इसका सरकारी वजूद खत्म नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि विभाग 20 वर्ष से सुनील कुमार से लगातार काम ले रहा है, जो यह साबित करता है कि खेल परिसर को इस पद की स्थायी जरूरत है। अगर जरूरत नहीं होती तो उन्हें दो दशक तक सेवा में रखने का कोई औचित्य नहीं था।
हाई कोर्ट ने कहा कि जब कोई राज्य किसी नागरिक की युवावस्था को सार्वजनिक सेवाओं के लिए उपयोग कर लेता है तो बढ़ती उम्र में उसे अचानक वित्तीय तंगी या तकनीकी नियमों का हवाला देकर अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि सुनील कुमार की सेवाओं को याचिका दायर करने की तिथि से ही पंप आपरेटर के पद पर नियमित माना जाए और इसके तहत आने वाले सभी वित्तीय लाभ दिए जाएं।
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