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हिमाचल हाई कोर्ट ने पुरानी पेंशन बहाली की अपील खारिज की, सिंगल जज के फैसले को ठहराया सही 

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Mon, 31 Aug 2026 05:32 PM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने धनी राम की पुरानी पेंशन बहाली की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्टका शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्टका शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पुरानी पेंशन बहाली की अपील खारिज की।

  2. मूल संगठन में OPS न होने पर कर्मचारी हकदार नहीं।

  3. धोखाधड़ी न होने पर दी गई पेंशन की वसूली नहीं।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने धनी राम (दिवंगत) के कानूनी वारिसों द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी अपने मूल (पैतृक) संगठन में केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के तहत शामिल नहीं था, तो सरकारी विभाग में स्थायी विलय के बाद भी वह पुरानी पेंशन का हकदार नहीं होगा। मामले के अनुसार मूल अपीलकर्ता धनी राम को वर्ष 1979 में एचपी स्टेट हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम कॉरपोरेशन में चपरासी/चौकीदार के रूप में नियुक्त किया गया था और 1985 में उनकी सेवाएं नियमित की गईं।

बाद में, वर्ष 2003 में उन्हें प्रतिनियुक्ति पर सामाजिक, महिला एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में क्लर्क के रूप में चुना गया। राज्य सरकार की 2012 की नीति के तहत जून 2013 में उन्हें इस विभाग में स्थायी रूप से समाहित कर लिया गया था। 

2015 में हुए सेवानिवृत्त

धनी राम मार्च 2015 में कनिष्ठ सहायक के पद से सेवानिवृत्त हुए, जिसके बाद विभाग ने उनकी पेंशन स्वीकृत कर दी थी। हालांकि, बाद में यह महसूस होने पर कि पेंशन गलत तरीके से दी गई थी, विभाग ने मई 2018 से इसे वापस ले लिया। इसके खिलाफ धनी राम ने सिंगल जज बेंच के समक्ष रिट याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।

नई पेंशन योजना के तहत आता था धनी राम

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि धनी राम अपने मूल कॉरपोरेशन में कर्मचारी भविष्य निधि या नई पेंशन योजना के तहत आते थे, न कि पुरानी पेंशन नियमावली के तहत। इसलिए, सरकार की विलय नीति के नियमों के मुताबिक वह पेंशन के हकदार नहीं हैं। 

कोर्ट ने सिंगल जज का फैसला सही ठहराया

कोर्ट ने सिंगल जज के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया। हालांकि, चूंकि पेंशन मिलने में कर्मचारी की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलत बयानी नहीं की गई थी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह मामले के सिद्धांतों के तहत अब तक दी जा चुकी पेंशन राशि की वसूली नहीं की जाएगी।

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