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फोरलेन निर्माण से ढह गया मकान, हिमाचल हाई कोर्ट ने NHAI और कंपनी को मुआवजा देने का दिया आदेश

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 09 Aug 2026 11:11 AM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने शिमला बाईपास निर्माण में लापरवाही से मकान ढहने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने एनएचएआइ ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने शिमला बाईपास निर्माण लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया।

  2. एनएचएआइ और कंपनी को पीड़ित महिला को मुआवजा देने का आदेश।

  3. चार सप्ताह में 50-50 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का निर्देश।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला बाईपास (पैकेज-टू) भट्टाकुफर पर फोरलेन राजमार्ग निर्माण के दौरान लापरवाही बरतने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) व निर्माण कंपनी मैसर्स गावर शिखा हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को फटकार लगाते हुए प्रभावित पीड़ित महिला को तुरंत मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया व न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने कोर्ट द्वारा खुद शुरू की स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के पश्चात यह आदेश पारित किए। 

चमियाणा का है मामला

यह मामला शिमला ग्रामीण के चमियाणा (संजय वन कालोनी) का है, जहां एनएच-5 से आने वाले फोरलेन हाईवे के लिए पहाड़ों की वर्टिकल कटाई (खड़ी कटाई) की जा रही थी। इस कारण 30 जून 2025 को एक भीषण भूस्खलन हुआ। इस कारण रंजना नामक महिला का चार मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

इस भूस्खलन के कारण रंजना के घर के ठीक पीछे स्थित चंदा देवी का साढ़े तीन मंजिला मकान भीअसुरक्षित और रहने लायक नहीं बचा है।

विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट पर संज्ञान

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट व विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि यह हादसा प्राकृतिक नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही का नतीजा था। कंपनी ने बिना किसी ठोस भू-तकनीकी व जल-निकासी योजना के पहाड़ियों को काटा। एनएचएआइ की ओर से अधिग्रहित चौड़ाई के नियमों का पालन न करने के कारण भी ढलान कमजोर हुई। 

5.61 करोड़ रुपये मूल्यांकन

उपमंडलीय मजिस्ट्रेट ने रंजना के मकान, जमीन और सामान के नुकसान का कुल मूल्यांकन 5.61 करोड़ रुपये से अधिक (सौ प्रतिशत सोलेटियम जोड़कर) किया था, जिसे पिछले साल ही एनएचएआइ को भेजा गया था। इसके बावजूद पीड़ित परिवार को एक पैसा तक नहीं दिया गया, जिसे कोर्ट ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण माना।

4 सप्ताह में भुगतान का आदेश

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि रंजना देवी के मकान व सामान के नुकसान के मूल्यांकन की कुल राशि (2,23,55,924) का 50-50 प्रतिशत हिस्सा एनएचएआइ और गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी आगामी चार सप्ताह में सीधे पीड़िता को भुगतान करें। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि भूस्खलन की जद में आए चंदा देवी के असुरक्षित मकान का भी तय प्रक्रिया के तहत तुरंत मूल्यांकन किया जाए।

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