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    मनाली से गीले कचरे को 300 KM दूर अंबाला भेजने का क्या औचित्य? हाई कोर्ट का संज्ञान, ...ऐसे तो प्रदूषण और बढ़ेगा

    By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 19 May 2026 05:16 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली नगर परिषद द्वारा गीले कचरे को 300 किलोमीटर दूर अंबाला भेजने के औचित्य पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने इसे प्रदूषण बढ़ाने वा ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जारगण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जारगण आर्काइव

    HighLights

    1. गीले कचरे को 300 KM दूर भेजने पर सवाल।

    2. प्रदूषण बढ़ने और दुर्गंध फैलने पर कोर्ट चिंतित।

    3. मनाली नगर परिषद पर भारी पर्यावरणीय जुर्माना।

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली नगर परिषद से गीले कचरे को अंबाला ले जाने के पीछे का तर्क पूछा है। कोर्ट ने कहा ऐसा करने से प्रदूषण कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है क्योंकि एक तो यह 300 किलोमीटर के पूरे रास्ते में बदबू फैलाता है और दूसरा इतनी लंबी दूरी तय करने के लिए गाड़ी चलाने से प्रदूषण पैदा करता है।

    मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी सी नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात आदेश दिए कि ऐसी परिस्थितियों में अगली सुनवाई की तारीख पर मनाली नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और मेसर्स सनटैन लाइफ प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित हों।

    आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही

    कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि 21 फरवरी 2026 को मनाली नगर परिषद के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किए गए निरीक्षण से पता चलता है कि हॉटस्पॉट से संयंत्र में प्राप्त मिश्रित कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही थी और उचित गंध और मक्खी नियंत्रण प्रणाली मौजूद नहीं थी।

    गीला अपशिष्ट पड़ा था खुले क्षेत्र में 

    मनाली नगर परिषद ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार संबंधित क्षेत्र से 100 फीसद स्रोत पृथक्करण प्राप्त नहीं किया था और गीला अपशिष्ट बिना किसी उपचार के खुले क्षेत्र में पड़ा हुआ था और लीचेट उत्पन्न कर रहा था। लीचेट के लिए बनाया गया एक गड्ढा कार्यशील नहीं है। नगर परिषद गीले अपशिष्ट को जटवार, अंबाला स्थित बायोगैस संयंत्र में भेज रही है। मनाली नगर परिषद ने गीले अपशिष्ट उपचार संयंत्र उपलब्ध नहीं कराया है।

    वैज्ञानिक तरीके से नहीं हो रही जैव-खनन प्रक्रिया

    रिपोर्ट के अनुसार कुल बकाया अपशिष्ट 78,464 टन था और मेसर्स सनटैन लाइफ प्राइवेट लिमिटेड ने जनवरी 2026 तक केवल 32778.46 टन पुराने कचरे का ही प्रसंस्करण किया है। कंपनी जैव-खनन प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से नहीं कर रही थी। आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रही थी। यह कचरा गोसदन के पास ब्यास नदी के करीब पाया गया, जो बिना किसी उपचार के सीधे नदी में बह रहा था।

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    लीचेट संग्रहण गड्ढे खाली पाए गए और लीचेट के उपचार के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इन परिस्थितियों में ब्यास नदी में अनुपचारित लीचेट के निर्वहन के लिए मनाली नगर परिषद पर 15,30,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। 

    लगाया है 2.83 करोड़ जुर्माना

    पुराने कचरे के आंकड़ों को दर्शाने वाला सारणीबद्ध चार्ट भी शपथ पत्र में उल्लिखित किया गया है और 45685.54 टन पुराने कचरे का प्रसंस्करण अभी बाकी है। संबंधित स्थलों पर ठोस कचरे के अवैज्ञानिक निपटान के लिए मनाली नगर परिषद पर 2,83,07,591 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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